असम चुनाव: देबव्रत सैकिया का गढ़ इस बार भाजपा के हाथों जाएगा, पवित्र मार्गेरिटा का दावा

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असम चुनाव: देबव्रत सैकिया का गढ़ इस बार भाजपा के हाथों जाएगा, पवित्र मार्गेरिटा का दावा

सारांश

गुवाहाटी में केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने दावा किया है कि आगामी असम विधानसभा चुनाव में भाजपा नाजिरा सीट पर जीत हासिल करेगी, जिससे कांग्रेस नेता देबव्रत सैकिया का गढ़ कमजोर होगा।

Key Takeaways

  • भाजपा का नाजिरा सीट पर जीतने का दावा
  • देबव्रत सैकिया का गढ़ कमजोर हो सकता है
  • 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में कड़ा मुकाबला
  • विकास के मुद्दे पर मतदाता भाजपा के साथ हो सकते हैं
  • कांग्रेस की राजनीतिक विरासत महत्वपूर्ण है

गुवाहाटी, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने गुरुवार को यह दावा किया कि अगले असम विधानसभा चुनाव में भाजपा नाजिरा सीट पर जीत हासिल करेगी, और कांग्रेस के नेता देबव्रत सैकिया इस बार अपने गढ़ को हारने वाले हैं।

नाजिरा में भाजपा के उम्मीदवार मयूर बोरगोहेन के समर्थन में चुनाव प्रचार करते हुए मार्गेरिटा ने कहा कि इस क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक वातावरण अब सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में बदल चुका है।

उन्होंने कहा, "यहां के मतदाता अब सरकार के साथ जुड़कर विकास और बेहतर अवसरों की तलाश कर रहे हैं।"

मार्गेरिटा ने आगे कहा, "नाजिरा के लोग अब सरकार के साथ रहना चाहते हैं। वे विकास और प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं और इस बार बदलाव के लिए मतदान करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र में भाजपा को काफी मजबूत समर्थन मिल रहा है।

यह ध्यान देने योग्य है कि नाजिरा परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

2016 के विधानसभा चुनाव में, वरिष्ठ कांग्रेस नेता देबव्रत सैकिया ने आरामदायक अंतर से यह सीट सुरक्षित रखी थी, जबकि उसी समय भाजपा राज्य में सत्ता में आई थी।

इसके बाद, 2021 के चुनाव में भी सैकिया ने भाजपा के उम्मीदवारों को हराकर अपनी स्थिति को और मजबूत किया।

वर्तमान में, सैकिया असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और राज्य में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।

वे अपने संगठनात्मक कौशल और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं, और भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बावजूद अपर असम में कांग्रेस को प्रासंगिक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

सैकिया, पूर्व मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया के पुत्र भी हैं, जिन्होंने असम की राजनीति में कई बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

हालांकि, इस राजनीतिक विरासत और पिछले चुनावी प्रदर्शन के बावजूद, भाजपा का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर और विकास के मुद्दे इस बार नाजिरा सीट पर मुकाबले का रुख बदल सकते हैं।

9 अप्रैल को होने वाले चुनाव में इस सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

Point of View

कांग्रेस के नेता देबव्रत सैकिया की राजनीतिक विरासत और जमीनी पकड़ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। चुनावी नतीजे क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
NationPress
08/04/2026

Frequently Asked Questions

भाजपा नाजिरा सीट पर क्यों जीतने का दावा कर रही है?
केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा का मानना है कि क्षेत्र का माहौल भाजपा के पक्ष में बदल चुका है, और मतदाता विकास की चाह में भाजपा को समर्थन दे रहे हैं।
देबव्रत सैकिया का राजनीतिक पूर्वानुमान क्या है?
देबव्रत सैकिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने पिछले चुनावों में भाजपा को हराया है, लेकिन इस बार भाजपा का दावा है कि स्थिति बदल सकती है।
नाजिरा सीट का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
नाजिरा सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है, जहाँ सैकिया ने कई बार जीत हासिल की है।
असम विधानसभा चुनाव कब होंगे?
असम विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होंगे।
क्या भाजपा का विकास पर जोर देना एक रणनीति है?
हाँ, भाजपा का जोर विकास और बेहतर अवसरों पर है, जिससे उन्हें मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हो सके।
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