स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मोदी के 25 साल के शासन की तारीफ की, 'राष्ट्र प्रथम' समर्पण को बताया प्रेरणा
सारांश
मुख्य बातें
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक सेवा-काल की सराहना करते हुए इसे देश के प्रति समर्पण, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रतिबद्धता का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई इस यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने पर मोदी को हार्दिक बधाई दी।
भारतीय दर्शन में सेवा को तपस्या की संज्ञा
अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भारतीय जीवन दर्शन में जनकल्याण के लिए किया गया कार्य एक प्रकार की तपस्या है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति अपना समय, शक्ति और अटल संकल्प देश की प्रगति में लगाता है, वह करोड़ों जीवनों में आशा का संचार करता है। यह विचार भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की उस अवधारणा पर आधारित है जिसमें राजनीति और सेवा को अलग नहीं माना जाता।
महिला-युवा सशक्तीकरण और आर्थिक विकास
धार्मिक नेता ने 'लखपति दीदी' पहल, स्वयं सहायता समूहों और महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को महिला सशक्तीकरण के ठोस उदाहरणों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास, शिक्षा, स्टार्टअप और नवाचार पर बल देने से युवाओं की रचनात्मक क्षमताओं को अवसर मिले हैं। 'सशक्त महिलाएँ और आत्मविश्वासी युवा एक समृद्ध राष्ट्र की बुनियाद हैं' — यह उनके संदेश का केंद्रीय सूत्र था।
भारत की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अवधेशानंद गिरि ने कहा कि विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देश की निरंतर उपस्थिति उल्लेखनीय है। उन्होंने मज़दूरों, किसानों, उद्यमियों और वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयासों को नीति-निर्धारण में नेतृत्व की भूमिका के साथ जोड़ा।
मेक इन इंडिया, डिजिटल क्रांति और इंफ्रास्ट्रक्चर
अवधेशानंद गिरि ने 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू उत्पादन के विस्तार को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सुदृढ़ कदम बताया। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शोध, डिज़ाइन और उत्पादन की कोशिशों को भविष्य की तकनीकी ज़रूरतों के प्रति दूरदर्शिता का प्रमाण कहा।
डिजिटल परिवर्तन के संदर्भ में उन्होंने UPI, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और सार्वजनिक सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी को आम नागरिकों के जीवन में सुविधा लाने वाली पहल बताया। 'पीएम गति शक्ति' के तहत हाईवे, रेलवे, हवाई अड्डों और ग्रामीण सड़कों के एकीकृत विकास को आर्थिक अवसरों के विस्तार का माध्यम बताया।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उपकरण निर्माण और बढ़ती क्षमताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब सैनिकों का साहस, वैज्ञानिकों की खोज और उद्योगों की दक्षता स्पष्ट राष्ट्रीय नीति से जुड़ती है, तो सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नींव और मज़बूत होती है।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और तीर्थस्थलों का विकास
अवधेशानंद गिरि ने सांस्कृतिक पक्ष को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम, श्री महाकाल लोक और केदारनाथ धाम के विकास को तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ इन धार्मिक स्थलों की गरिमा को बढ़ाने वाला कदम बताया।
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और श्री राम लला की प्राण-प्रतिष्ठा को उन्होंने करोड़ों भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद का अवसर बताया। उनके अनुसार, 'काशी ज्ञान और मुक्ति की प्रतीक है, अयोध्या सम्मान और जनकल्याण की, और महाकाल की आराधना समय के महत्व का स्मरण कराती है।'
विकसित भारत 2047 का संकल्प और आगे का मार्ग
धर्मगुरु ने कहा कि 'वैक्सीन मैत्री' अभियान ने वैश्विक सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को उजागर किया। उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को इस यात्रा का भविष्यमुखी आयाम बताया और कहा कि इसे प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से ही साकार किया जा सकेगा।
अंत में उन्होंने मोदी की कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए 25 साल पूरे होने पर उन्हें हार्दिक बधाई दी।