अयोध्या रामकोट परिक्रमा का एक वर्ष पूर्ण, हजारों श्रद्धालुओं ने अंतर्गृही परिक्रमा में लगाई आस्था की डुबकी
सारांश
मुख्य बातें
रामनगरी अयोध्या में प्रतिदिन आयोजित होने वाली रामकोट परिक्रमा ने 21 अगस्त 2026 को अपना एक वर्ष पूरा किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सुबह 5:30 बजे आरंभ हुई विशेष परिक्रमा में साधु-संतों सहित हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े और पूरे रामकोट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा गया। यह परिक्रमा, जिसे प्राचीन परंपरा में 'अंतर्गृही परिक्रमा' कहा जाता था, राम मंदिर निर्माण के बाद नियमित रूप से पुनः प्रारंभ की गई है।
परिक्रमा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अंतर्गृही परिक्रमा सदियों पुरानी परंपरा है जिसे साधु-संत और तपस्वी प्राचीन काल से निभाते आए हैं। राम मंदिर ट्रस्ट ने इस परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए इसे दैनिक आयोजन का रूप दिया। यह परिक्रमा राम लला मंदिर, हनुमानगढ़ी सहित रामकोट क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक प्रमुख मंदिरों को समाहित करती है और इसे पूरा करने में लगभग एक घंटे का समय लगता है।
मुख्य घटनाक्रम
वार्षिकोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही। सामान्यतः प्रतिदिन लगभग 5,000 श्रद्धालु इस परिक्रमा में सहभागी होते हैं। आज महंत, आचार्य, साधु-संत और आम भक्त एक साथ परिक्रमा पथ पर एकत्रित हुए। परिक्रमा पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान राम के दर्शन किए।
विशेषजनों की प्रतिक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा ने इस अवसर पर कहा, 'साधु-संत और तपस्वी प्राचीन काल से ही रामकोट परिक्रमा को अंतर्गृही परिक्रमा के तौर पर करते आ रहे हैं। राम मंदिर के निर्माण के बाद से रोजाना रामकोट परिक्रमा शुरू की गई। संत समाज और श्रद्धालु रोजाना परिक्रमा करने के बाद भगवान राम के दर्शन करते हैं। आज एक वर्ष पूरे होने पर इस परिक्रमा में आए सभी का स्वागत है।'
राम मंदिर ट्रस्ट की धार्मिक समिति के सदस्य एवं राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने कहा, 'आज ठाकुर श्री राम लल्ला, श्री हनुमान जी और रामकोट परिक्रमा क्षेत्र में मौजूद एक दर्जन से ज़्यादा अन्य मंदिरों की परिक्रमा में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। साधु-संत, महंत, आचार्य और हजारों श्रद्धालु एक साथ मिलकर परिक्रमा करने के लिए जुटे। ये रोजाना होती है। इसमें करीब एक घंटे का समय लगता है।'
आम जनता पर असर
महंत राजकुमार दास ने अयोध्या आने वाले तीर्थयात्रियों से आग्रह किया कि यदि वे बड़ी पंचकोसी या 14 कोसी परिक्रमा करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें कम से कम अंतर्गृही रामकोट परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। यह परिक्रमा अब अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा का एक अनिवार्य अंग बनती जा रही है।
आगे की राह
राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यह परिक्रमा आने वाले वर्षों में और अधिक व्यवस्थित एवं विस्तृत रूप लेगी। गौरतलब है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और रामकोट परिक्रमा इस आस्था के प्रवाह को संगठित रूप देने का एक सशक्त माध्यम बन रही है।