क्या अभिव्यक्ति की आजादी बाबा साहेब की देन है?
सारांश
Key Takeaways
- अभिव्यक्ति की आजादी का प्रावधान बाबा साहेब के संविधान में है।
- केंद्र सरकार लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
- दलितों के अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।
- संविधान की सुरक्षा सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
- लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।
जयपुर, 6 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने शनिवार को जानकारी दी कि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई।
डोटासरा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर ने देश को संविधान प्रदान किया, जिसके आधार पर शासन की प्रक्रिया संचालित होती है। उनके संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी का प्रावधान है, जिसके तहत हर नागरिक को किसी भी मुद्दे पर बोलने का पूरा अधिकार दिया गया है। इस अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा श्रेय बाबा साहेब को जाता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बात को नकारा नहीं किया जा सकता कि हिंदुस्तान का लोकतंत्र इस विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसका पूरा श्रेय बाबा साहेब अंबेडकर को जाता है। लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार अपनी कार्यशैली से देश के लोकतंत्र को समाप्त करने की कोशिश कर रही है, जो उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के शासनकाल में दलितों पर अपमान के मामले बढ़ रहे हैं। दलित समुदाय के हितों पर लगातार कुठाराघात किया जा रहा है। दलितों का उत्थान पूरी तरह से ठप हो चुका है और यह सब कुछ केंद्र की मौजूदा सरकार के कारण हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा संविधानिक संस्थाओं पर हमले किए जा रहे हैं, चाहे वह सीबीआई हो, ईडी हो या चुनाव आयोग। इस सरकार की कोशिश है कि सभी प्रकार की संविधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जाए। लेकिन मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जब कांग्रेस पार्टी विपक्ष में है, तब तक हम इस तरह की स्थिति को किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी द्वारा संविधान बचाओ रैली का आयोजन किया गया। साथ ही, जो भाजपा 400 से ज्यादा सीटों पर जीत का दावा कर रही थी, वह केवल 240 सीटों पर सिमट गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान में लगातार लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। जो पंचायती राज और नगर निकाय के चुनाव 73वें और 74वें संशोधन के तहत हो जाने चाहिए थे, वे अब तक नहीं हो पाए।
उन्होंने कहा कि बार-बार संविधान की अवहेलना करना इन लोगों की आदत बन गई है, क्योंकि उन्हें इस बात का विश्वास नहीं है कि बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया है।