15 अक्टूबर 2026
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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन: बाल स्वास्थ्य हो भारत की स्वास्थ्य नीति का केंद्र, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध ज़रूरी

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन: बाल स्वास्थ्य हो भारत की स्वास्थ्य नीति का केंद्र, आयुर्वेद में वैज्ञानिक शोध ज़रूरी

सारांश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कौमाराकॉन-2026 में स्पष्ट कहा — आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर ले जाना है तो वैज्ञानिक प्रमाण अनिवार्य है। बाल स्वास्थ्य को विकसित भारत 2047 की नींव बताते हुए उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 15 अक्टूबर 2026 को कौमाराकॉन-2026 सम्मेलन का उद्घाटन किया और बाल स्वास्थ्य को स्वास्थ्य नीति के केंद्र में रखने का आह्वान किया।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के 10वें स्थापना दिवस पर संस्थान को एम्स के समकक्ष विकसित करने के विज़न पर ज़ोर दिया गया।
उपराष्ट्रपति ने आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल , वामन ऐप , पंचकर्म असेसमेंट ऐप और आयुर्वेद डिजिटल इनोवेशन फैसिलिटी लॉन्च किए।
महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, यूएसए और एआईआईए के बीच अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए।
2047 तक 'विकसित भारत' लक्ष्य के लिए बाल पोषण, विकास और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'कौमाराकॉन-2026' के उद्घाटन समारोह में कहा कि बाल स्वास्थ्य को भारत की स्वास्थ्य सेवा प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद में व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की प्रामाणिकता सिद्ध करने से ही मरीजों का विश्वास जीता जा सकता है और भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक पहचान मिल सकती है। यह सम्मेलन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली द्वारा कौमारभृत्य विषय पर आयोजित किया गया था।

एआईआईए का विकास और प्रधानमंत्री का विज़न

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न का उल्लेख किया जिसमें अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को एम्स के समकक्ष विकसित करने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि संस्थान इस संकल्प को साकार करने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। एआईआईए के 10वें स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए राधाकृष्णन ने अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता में निरंतर प्रयासों की आवश्यकता रेखांकित की।

आयुष मंत्रालय और अंतर्विषयक सहयोग

उपराष्ट्रपति ने 2014 में एक स्वतंत्र आयुष मंत्रालय की स्थापना का उल्लेख करते हुए शिक्षा को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने में इसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर, सीएसआईआर, डीबीटी, डीएसटी तथा एम्स जैसे संस्थानों के बीच अंतर्विषयक सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। राधाकृष्णन ने कहा कि प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आयुष सेवाओं के एकीकरण से पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा के बीच संवाद तथा सहयोग के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।

वैश्विक मान्यता और भारत की पारंपरिक विरासत

उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और सदियों पुरानी ज्ञान परंपराओं की अनमोल विरासत बताया। उन्होंने योग को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता और जामनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना को भारत के पारंपरिक ज्ञान को विश्व के साथ साझा करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र में मुख्यधारा में लाने की माँग तेज़ हो रही है।

बाल स्वास्थ्य और विकसित भारत 2047

सम्मेलन के विषय — 'शेपिंग द फ्यूचर ऑफ चाइल्ड हेल्थ: ग्लोबल पर्सपेक्टिव्स, रिसर्च इनोवेशंस एंड क्लिनिकल फ्रंटियर्स इन कौमारभृत्य' — का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह हर बच्चे को स्वस्थ एवं अनुकूल माहौल में पालने-पोसने की हमारी साझा ज़िम्मेदारी को दर्शाता है। उन्होंने बच्चों के पोषण, वृद्धि, विकास, बीमारी से बचाव और भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए बाल स्वास्थ्य और मानव पूंजी की गुणवत्ता पर निरंतर ध्यान देना अनिवार्य है।

डिजिटल नवाचार और अंतरराष्ट्रीय समझौता

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, एआईआईए-आईकेने वेबसाइट और आयुर्वेद डिजिटल इनोवेशन एंड वेंचर एक्सेलेरेशन फैसिलिटी का उद्घाटन किया। उन्होंने वामन ऐप और पंचकर्म असेसमेंट ऐप भी लॉन्च किए। इस अवसर पर महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, यूएसए और एआईआईए, नई दिल्ली के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) का भी आदान-प्रदान हुआ। इस कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग की अध्यक्ष डॉ. मनीषा उपेंद्र और एआईआईए के निदेशक प्रोफेसर पी.के. प्रजापति सहित अनेक गणमान्य अतिथि, शोधकर्ता और छात्र उपस्थित थे। आगे शोधकर्ताओं और चिकित्सकों से यह अपेक्षा की गई है कि वे पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करते हुए वैज्ञानिक मान्यता के माध्यम से बाल स्वास्थ्य को अपने प्रयासों के केंद्र में रखें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि आईसीएमआर और एम्स जैसे संस्थानों के साथ अंतर्विषयक सहयोग की घोषणाएँ कितनी बार ठोस प्रकाशित शोध में बदल पाई हैं। बाल स्वास्थ्य में आयुर्वेदिक हस्तक्षेप की प्रभावशीलता पर अभी भी सहकर्मी-समीक्षित साक्ष्य सीमित हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से बाल स्वास्थ्य को जोड़ना राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली है, पर मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि कौमारभृत्य के नैदानिक परिणामों को मापने के लिए कोई ठोस संकेतक तय हुआ है या नहीं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौमाराकॉन-2026 सम्मेलन क्या है?
कौमाराकॉन-2026 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली द्वारा आयोजित कौमारभृत्य (आयुर्वेदिक बाल चिकित्सा) विषय पर तीसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जो 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित हुआ। इसका विषय बाल स्वास्थ्य में वैश्विक दृष्टिकोण, शोध नवाचार और नैदानिक सीमाओं पर केंद्रित था।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आयुर्वेद पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आयुर्वेद में व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान आवश्यक है ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की प्रामाणिकता सिद्ध हो सके और मरीजों का विश्वास जीता जा सके। उन्होंने भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर जैसे संस्थानों के बीच अंतर्विषयक सहयोग पर भी जोर दिया।
एआईआईए के स्थापना दिवस पर क्या विशेष हुआ?
एआईआईए के 10वें स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति ने आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, एआईआईए-आईकेने वेबसाइट, आयुर्वेद डिजिटल इनोवेशन एंड वेंचर एक्सेलेरेशन फैसिलिटी, वामन ऐप और पंचकर्म असेसमेंट ऐप लॉन्च किए। साथ ही महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, यूएसए और एआईआईए के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए।
बाल स्वास्थ्य और विकसित भारत 2047 का क्या संबंध बताया गया?
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए बच्चों के स्वास्थ्य और मानव पूंजी की गुणवत्ता पर निरंतर ध्यान देना अनिवार्य है। उन्होंने बच्चों के पोषण, वृद्धि, विकास, बीमारी की रोकथाम और भावनात्मक स्वास्थ्य को इस लक्ष्य की आधारशिला बताया।
जामनगर में WHO का पारंपरिक चिकित्सा केंद्र क्यों महत्वपूर्ण है?
जामनगर में स्थापित WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को उपराष्ट्रपति ने भारत के पारंपरिक ज्ञान को दुनिया के साथ साझा करने का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। यह केंद्र वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों को संस्थागत रूप देता है।
राष्ट्र प्रेस
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