उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: स्वास्थ्य सेवा में करुणा और चिकित्सा अनुसंधान में अधिक निवेश ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को विजयवाड़ा में डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रूबी जुबली समारोह को संबोधित करते हुए चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार में अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रौद्योगिकी को मानवता की सेवा में होना चाहिए और स्वास्थ्य सेवा के केंद्र में करुणा का भाव अनिवार्य है।
मुख्य संबोधन: स्वास्थ्य, तकनीक और करुणा
राधाकृष्णन ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियाँ स्वास्थ्य सेवा को नया रूप देने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं, परंतु इस परिवर्तन की धुरी करुणा होनी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक होती है जब वह आम नागरिक के जीवन को बेहतर बनाए।
उन्होंने डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध सक्रिय नेतृत्व करने और नशामुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का भी आग्रह किया। गौरतलब है कि नशे की समस्या भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है, और चिकित्सा समुदाय की भूमिका इसमें केंद्रीय मानी जाती है।
आंध्र प्रदेश की दो दिवसीय यात्रा
उपराष्ट्रपति ने सोमवार को आंध्र प्रदेश की दो दिवसीय यात्रा का आगाज़ किया। इस दौरे में तिरुपति के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर और तिरुचनूर के श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर में दर्शन और प्रार्थना भी शामिल है।
विजयवाड़ा पहुँचने से पूर्व, राधाकृष्णन ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'आदिकवि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण, भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों की एक अमूल्य धरोहर है। इसमें निहित सत्य, कर्तव्य, त्याग, करुणा और धर्म के आदर्श आज भी मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी शिक्षाएं हमें हमेशा नैतिक मूल्यों को अपनाने और एक सामंजस्यपूर्ण, संवेदनशील तथा सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।'
दिल्ली में संघवाद और कानून सुधार सम्मेलन
विजयवाड़ा दौरे से पूर्व, उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में 'सहयोगात्मक संघवाद और कानून सुधार: राष्ट्रीय और राज्य परिप्रेक्ष्य' विषयक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देश के कानूनी ढाँचे को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
'टीम इंडिया' की भावना का आह्वान करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर परामर्श, समन्वय और साझा जिम्मेदारी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'टीम इंडिया' की परिकल्पना यही माँग करती है कि व्यापक जनहित के कार्यों में राजनीतिक मतभेद कभी बाधा नहीं बनने चाहिए।
सहकारी संघवाद पर जोर
उपराष्ट्रपति ने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद दोनों के महत्व को रेखांकित किया। उनका कहना था कि जब केंद्र और राज्य साझा उद्देश्यों के लिए मिलकर काम करते हैं, तभी नागरिकों तक शासन का असली लाभ पहुँचता है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंधों पर राजनीतिक बहस तेज़ है।
आगे क्या
उपराष्ट्रपति की आंध्र प्रदेश यात्रा मंगलवार तक जारी रहेगी, जिसमें तिरुपति दर्शन की कार्यक्रम सूची है। चिकित्सा अनुसंधान में निवेश और नशामुक्ति पर उनके आह्वान से स्वास्थ्य नीति विमर्श में नई ऊर्जा आने की संभावना है।