भारत-SACU व्यापार समझौते पर बातचीत जारी: दक्षिण अफ्रीका के महावाणिज्य दूत गिदोन लाबाने
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के महावाणिज्य दूत गिदोन लाबाने ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि भारत और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के बीच एक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत फिर से सक्रिय हुई है। हालाँकि, अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि किन वस्तुओं को इस समझौते के दायरे में शामिल किया जाएगा, लेकिन लाबाने के अनुसार वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुंबई में क्या बोले लाबाने
देश की आर्थिक राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए लाबाने ने कहा, 'दोनों ही पक्ष इस बात से निराश हैं कि अभी कोई व्यापार समझौता नहीं है। इससे चीजें हमारी उम्मीद से धीमी रही हैं, लेकिन हम सभी जानते हैं कि दोनों तरफ सरकारी कामकाज कितना धीमा हो सकता है।'
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को संयम बनाए रखने की ज़रूरत है। समझौते में कौन-सी वस्तुएँ शामिल होंगी, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
SACU क्या है और इसमें कौन-से देश हैं
SACU यानी सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन दक्षिणी अफ्रीका का एक क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक है। लाबाने के अनुसार इसमें दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, लेसोथो और स्वाजीलैंड सहित लगभग पाँच देश शामिल हैं। यह ब्लॉक अफ्रीकी महाद्वीप के दक्षिणी हिस्से की अर्थव्यवस्थाओं को एकजुट करता है और भारत के लिए एक संभावित बड़ा व्यापारिक साझेदार हो सकता है।
भारत-दक्षिण अफ्रीका के साझा संबंध
लाबाने ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग की मज़बूत नींव है। उन्होंने कहा कि दोनों देश पहले एक ही औपनिवेशिक ताकतों के अधीन रहे हैं, जिससे एक साझा ऐतिहासिक विरासत बनती है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं, जो दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाते हैं।
वार्ता में ताज़ा प्रगति
गौरतलब है कि भारत और SACU के बीच व्यापार समझौते पर चर्चाएँ वर्षों से चल रही हैं, लेकिन प्रगति सीमित रही है। लाबाने के अनुसार, हाल के समय में इस प्रक्रिया में नई गति आई है, खासकर जब से भारत ने SACU के साथ बातचीत को औपचारिक रूप से फिर से शुरू किया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर कई मुक्त व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों की वार्ता की गति और वस्तुओं की सूची पर बनने वाली सहमति ही इस समझौते की दिशा तय करेगी।