11 अक्टूबर 2026
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बंगला साहिब में पुलिस प्रवेश पर सरना का विरोध: अमित शाह और पुलिस कमिश्नर से जांच की मांग

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बंगला साहिब में पुलिस प्रवेश पर सरना का विरोध: अमित शाह और पुलिस कमिश्नर से जांच की मांग

सारांश

सीजेपी विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रवेश पर शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे 1955 और 1984 की घटनाओं से जोड़ते हुए गृह मंत्री अमित शाह से जांच और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश की माँग की है।

मुख्य बातें

परमजीत सिंह सरना ने 11 अक्टूबर 2026 को गुरुद्वारा बंगला साहिब में दिल्ली पुलिस के प्रवेश की कड़ी निंदा की।
सरना के अनुसार 20 से 25 पुलिसकर्मी सीजेपी प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए; वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने का दावा।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के 'क्रॉसिंग' वाले बयान को सरना ने पूरी तरह नकारा।
1947 के बाद 1955 में पहली बार पुलिस दरबार साहिब गई थी, जिससे तत्कालीन मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर को इस्तीफा देना पड़ा था।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान द्वारा पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराए जाने पर सरना ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
सरना ने गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से जांच और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की माँग की।

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने 11 अक्टूबर 2026 को ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब में दिल्ली पुलिस के प्रवेश की कड़े शब्दों में निंदा की है। सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई इस घटना को उन्होंने सिख मर्यादा और परंपरा का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा दिल्ली पुलिस कमिश्नर से निष्पक्ष जांच कराने एवं जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है।

क्या हुआ बंगला साहिब में

सरना के अनुसार, सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी अशोक रोड की दिशा से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश कर गए। इसके बाद 20 से 25 पुलिसकर्मी उन प्रदर्शनकारियों का पीछा करते हुए गुरुद्वारे तक पहुँच गए। दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पुलिस केवल वहाँ से 'क्रॉस' कर रही थी, लेकिन सरना ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनके पास वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है जिसमें पुलिस का पीछा करना स्पष्ट दिखता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और सिख मर्यादा

सरना ने इस घटना की तुलना भारतीय इतिहास की दो संवेदनशील घटनाओं से की। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद पहली बार 1955 में पुलिस दरबार साहिब गई थी, जब पंजाब के मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर थे। उस घटना के बाद सिखों में इतना आक्रोश उत्पन्न हुआ था कि कांग्रेस की केंद्रीय नेतृत्व को सच्चर का इस्तीफा लेना पड़ा और प्रताप सिंह कैरों को मुख्यमंत्री पद सौंपा गया। इसके बाद 1984 में भी इसी प्रकार की एक घटना हुई थी। सरना ने कहा कि गुरुद्वारा बंगला साहिब आठवें गुरु श्री गुरु हरकृष्ण साहिब जी का पवित्र ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ गुरु साहिब दिल्ली प्रवास के दौरान ठहरे थे — ऐसे स्थान पर वर्दीधारी पुलिस का जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं था।

पुलिस के रवैये पर एतराज़

सरना ने कहा कि पुलिस को उचित रूप से ब्रीफ किया जाना चाहिए था। गुरुद्वारे के दो दरवाजे हैं — पुलिस को एक-एक दरवाजे पर तैनात रहना था, ताकि बाहर आने वाले प्रदर्शनकारियों को वहीं रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं दरबार साहिब अमृतसर में देखा है कि पुलिस अधिकारी जब माथा टेकने जाते हैं तो सादे वस्त्र पहनकर जाते हैं, वर्दी में नहीं। वर्दीधारी पुलिस का गुरुद्वारे में प्रवेश सिख मर्यादा के सर्वथा विरुद्ध है।

गुरुद्वारा कमेटी प्रधान पर सवाल

सरना ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान पर भी तीखा प्रहार किया। उनका कहना था कि कमेटी प्रधान का मूल दायित्व गुरुद्वारे की मर्यादा की रक्षा करना है, न कि पुलिस कार्रवाई का बचाव करना। उन्होंने आरोप लगाया कि कमेटी प्रधान ने दिल्ली के एक मंत्री के कहने पर यह बयान दिया और वह बयान पढ़-पढ़कर दे रहे थे। सरना ने कहा कि ऐसे बयान के बाद वे सिख समुदाय को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे।

आगे की राह और सरना की अपील

सरना ने स्पष्ट किया कि यह किसी सरकार या राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का मामला नहीं है, बल्कि यह सिख परंपरा और गुरुघर की मर्यादा की रक्षा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि हर धर्मस्थल — चाहे गुरुद्वारा हो, मंदिर हो या मस्जिद — की पवित्रता की रक्षा होनी चाहिए। उनकी माँग है कि गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करें कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में पुलिस गुरुद्वारे के अंदर प्रवेश न करे। जो हो चुका है उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन भविष्य के लिए इस घटना से सबक लेना अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि उस घटना ने भी एक मुख्यमंत्री की कुर्सी हिला दी थी। असली सवाल यह है कि क्या पुलिस बल को धार्मिक स्थलों की सीमाओं के बारे में पर्याप्त संवेदनशीलता प्रशिक्षण दिया जाता है — और अगर नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी है। दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान का कथित बचावपूर्ण रुख इस संस्था की स्वायत्तता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुद्वारा बंगला साहिब में पुलिस प्रवेश का विवाद क्या है?
सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी अशोक रोड की ओर से गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में प्रवेश कर गए, जिसके बाद कथित तौर पर 20 से 25 वर्दीधारी पुलिसकर्मी उनका पीछा करते हुए गुरुद्वारे तक पहुँच गए। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
परमजीत सिंह सरना ने किससे और क्या माँग की है?
सरना ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की माँग की है। उनका कहना है कि किसी भी परिस्थिति में वर्दीधारी पुलिस को गुरुद्वारे के अंदर नहीं जाना चाहिए।
क्या पहले भी गुरुद्वारे में पुलिस प्रवेश जैसी घटनाएँ हुई हैं?
सरना के अनुसार 1947 के बाद 1955 में पहली बार पुलिस दरबार साहिब गई थी, जब पंजाब के मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर थे। उस घटना के बाद सिख समुदाय में व्यापक रोष फैला और कांग्रेस नेतृत्व को सच्चर का इस्तीफा लेकर प्रताप सिंह कैरों को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा था। 1984 में भी इसी प्रकार की एक घटना हुई थी।
दिल्ली पुलिस का इस मामले में क्या पक्ष है?
दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने बयान जारी कर कहा है कि पुलिसकर्मी केवल उस स्थान से 'क्रॉस' कर रहे थे। हालाँकि सरना ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके पास वीडियो साक्ष्य है जिसमें पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों का पीछा किया जाना स्पष्ट दिखता है।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का रुख क्यों विवादित है?
सरना ने आरोप लगाया कि कमेटी के प्रधान ने पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराने वाला बयान दिया, जो उनके मूल दायित्व — गुरुद्वारे की मर्यादा की रक्षा — के विपरीत है। सरना ने दावा किया कि यह बयान दिल्ली के एक मंत्री के निर्देश पर दिया गया और कमेटी प्रधान बयान पढ़-पढ़कर बोल रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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