ढाका में दुर्गा पूजा: भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कई पंडालों में मनाया उत्सव
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 19 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा उत्सव में सक्रिय भागीदारी की। वे अपनी पत्नी मृणाल त्रिवेदी के साथ कई आयोजन स्थलों पर पहुँचे, श्रद्धालुओं और आयोजकों को शुभकामनाएँ दीं तथा मातारानी का आशीर्वाद लिया। यह उनकी ढाका में उच्चायुक्त के रूप में पहली दुर्गा पूजा है।
किन-किन स्थलों पर पहुँचे त्रिवेदी
दिनेश त्रिवेदी और मृणाल त्रिवेदी सबसे पहले गुलशन-बनानी सर्बजनीन पूजा फाउंडेशन द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने वहाँ आयोजकों और भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इसके बाद वे ऐतिहासिक रमना काली मंदिर के पवित्र परिसर में पहुँचे, जहाँ उन्होंने माँ काली की आराधना की।
त्रिवेदी ढाका विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित जगन्नाथ हॉल में आयोजित समारोह का भी हिस्सा बने। इस अवसर पर उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, 'विश्वविद्यालय समुदाय के साथ बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने दुर्गा पूजा की भावना का जश्न मनाया। वो ढाका विश्वविद्यालय के जगन्नाथ हॉल पहुँचे और छात्रों, आयोजकों तथा भक्तों के साथ इस अवसर की खुशी साझा की।'
इससे एक दिन पूर्व, 18 अक्टूबर 2026 (रविवार) को, वे बारीधारा डीओएचएस कन्वेंशन सेंटर पंडाल में भी गए थे। उच्चायोग ने इसकी जानकारी सोमवार को साझा करते हुए लिखा, 'बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी, 18 अक्टूबर को ढाका के बारीधारा डीओएचएस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दुर्गा पूजा समारोह में शामिल हुए।'
त्रिवेदी की नियुक्ति और उनका दृष्टिकोण
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को भारत सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया था। उन्होंने 12 जून 2026 को ढाका में औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाला। तब से वे लगातार द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में सक्रिय रहे हैं और दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को रिश्तों की आधारशिला मानते रहे हैं।
द्विपक्षीय संबंधों पर त्रिवेदी का संदेश
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए 'लगातार बातचीत, आपसी सम्मान और भरोसे की ज़रूरत है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच मौजूद हर समस्या का समाधान संभव है।
ढाका में चल रहे 'बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन' के दौरान 'शक्ति और विवेक: बिना टकराव के बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का प्रबंधन' विषय पर चर्चा में त्रिवेदी ने कहा, 'मुद्दों को छिपाने या उन पर बात न करने का कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने पानी, व्यापार, संस्कृति, खेल, संचार और परिवहन जैसे सभी लंबित मुद्दों पर 'उचित मंचों के माध्यम से' बातचीत पर ज़ोर दिया।
सांस्कृतिक कूटनीति का महत्त्व
गौरतलब है कि भारत-बांग्लादेश संबंध हाल के महीनों में कुछ तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में उच्चायुक्त का दुर्गा पूजा जैसे सांस्कृतिक उत्सवों में सार्वजनिक भागीदारी कूटनीतिक दृष्टि से सांकेतिक महत्त्व रखती है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश कई संवेदनशील मुद्दों पर संवाद की प्रक्रिया में हैं। त्रिवेदी ने स्वयं स्वीकार किया कि 'बातचीत की प्रक्रिया भले ही धीमी हो, लेकिन यह रुकी नहीं है।'