30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या बसंत पंचमी से शुरू होता है होली का पर्व? जानें धर्म और ऋतु का संबंध

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या बसंत पंचमी से शुरू होता है होली का पर्व? जानें धर्म और ऋतु का संबंध

सारांश

बसंत पंचमी और होली का गहरा संबंध है। जानें कैसे यह त्योहार एक-दूसरे से जुड़े हैं और इनका धार्मिक महत्व क्या है।

मुख्य बातें

बसंत पंचमी विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा का दिन है।
यह दिन बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
होली का उत्सव बसंत पंचमी से शुरू होता है।
प्रकृति की सुंदरता का स्वागत करते हुए, हम नई ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
ये त्योहार प्रेम और उत्साह का प्रतीक हैं।

नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मकर संक्रांति के बाद पूरे देश में बसंत पंचमी की तैयारियाँ आरंभ हो चुकी हैं। यह पर्व हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है।

इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है, लेकिन बसंत पंचमी के साथ ही होली के उत्सव की शुरुआत भी होती है, जबकि होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है। आज हम आपको बसंत पंचमी और होली के बीच के धार्मिक संबंध के बारे में बताएंगे।

बसंत ऋतु के साथ ही बसंत पंचमी का आगमन होता है। यह दिन संकेत करता है कि अब सर्दी का समय समाप्त हो रहा है और बसंत ऋतु का आगमन हो रहा है। इस मौसम को ऋतुओं का राजा कहा जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति का सबसे सुंदर रूप देखने को मिलता है, जहां चारों ओर पेड़ों पर फूल खिलते हैं और सरसों के खेत पीले फूलों से लहलहा उठते हैं। इसीलिए इसे नई खुशियों और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे प्रकृति की पूजा का दिन भी माना गया है।

बसंत पंचमी और होली दोनों ही बसंत ऋतु से संबंधित त्योहार हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत ऋतु का आगमन होली के उत्सव का संकेत देता है। इसी दिन से फाग के गीत गाने शुरू कर दिए जाते हैं। खासकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से होली की शुरुआत हो जाती है और यह उत्सव 40 दिनों तक चलता है। हर दिन मंदिरों में भगवान को गुलाल अर्पित किए जाते हैं। बसंत ऋतु से प्रकृति अपने 12 रंगों को दिखाने लगती है और नई ऊर्जा का उत्सव मनाती है। यही कारण है कि इसी एक महीने तक प्रकृति के रंगों के साथ होली की तैयारी की जाती है। इसे प्रकृति का उत्सव भी कहा जाता है।

बसंत पंचमी पर जहां शांति और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है, वहीं ऋतु के जाते-जाते और फाल्गुन माह के करीब आते-आते यह शांति, उत्साह और उल्लास में बदल जाती है। पौराणिक कथाओं में बसंत पंचमी और होली को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसीलिए बसंत पंचमी से लेकर होली तक के समय को प्रेम और उत्साह का समय माना गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ये हमें प्रकृति के प्रति जागरूक करने और संस्कृति के महत्व को समझने का भी अवसर देते हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है, जो विद्या और ज्ञान की देवी मानी जाती हैं।
होली कब मनाई जाती है?
होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो बसंत पंचमी के 40 दिन बाद आता है।
बसंत पंचमी और होली का क्या संबंध है?
बसंत पंचमी का आगमन होली के उत्सव की शुरुआत का संकेत देता है, और ये दोनों त्योहार बसंत ऋतु से जुड़े हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले