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क्या बेड़ी हनुमान मंदिर में सदियों से कैद हैं भगवान हनुमान? जानें इसकी दिलचस्प कहानी

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क्या बेड़ी हनुमान मंदिर में सदियों से कैद हैं भगवान हनुमान? जानें इसकी दिलचस्प कहानी

सारांश

क्या आपको पता है कि बेड़ी हनुमान मंदिर में भगवान हनुमान सदियों से जंजीरों में बंधे हैं? जानें इस अद्भुत मंदिर की रहस्यमय कथा और क्यों उन्हें बंदी बना रखा गया।

मुख्य बातें

बेड़ी हनुमान मंदिर भगवान हनुमान की अनोखी कथा का प्रतीक है।
यह मंदिर उड़ीसा के पुरी में स्थित है।
भगवान हनुमान को समुद्र देवता को रोकने के लिए जंजीरों में बांधा गया है।
मंदिर की वास्तुकला 15वीं शताब्दी की है।
यहां राम , लक्ष्मण और सीता की प्रतिमाएं भी हैं।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को उनकी अनंत ऊर्जा और शक्ति के लिए जाना जाता है। महाशक्तिशाली रावण भी भगवान हनुमान की पूंछ को नहीं बांध पाया था, लेकिन भारत में एक ऐसी जगह है, जहां भगवान हनुमान लोहे की जंजीरों में बंधे हुए हैं। तो उन्हें किसने कैद किया और क्यों? आज हम आपको श्री जगन्नाथ मंदिर के निकट स्थित बेड़ी हनुमान मंदिर के बारे में बताएंगे।

उड़ीसा के पुरी समुद्र तट के पास चक्र तीर्थ रोड पर बेड़ी हनुमान मंदिर है। यहां भगवान हनुमान लोहे की बेड़ियों में बंधे हुए हैं। समुद्र के निकट होने के कारण इस मंदिर को दरिया महावीर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान हनुमान यहां भले ही बेड़ियों में बंधे हैं, लेकिन वे पुरी के रक्षक के रूप में वर्षों से यहां विराजमान हैं।

ऐसा माना जाता है कि जब भी समुद्र देवता भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते थे, तब पुरी के आस-पास के गांव पानी में डूब जाते थे और बहुत नुकसान होता था। एक दिन भक्तों ने अपनी समस्याएं भगवान जगन्नाथ को सुनाईं। भगवान जगन्नाथ ने समुद्र तट पर भगवान हनुमान को तैनात किया और उन्हें समुद्र देवता को रोकने का आदेश दिया।

कुछ समय तक भगवान हनुमान अपने कर्तव्यों का पालन करते रहे, लेकिन जब भी राम नाम का भजन-कीर्तन सुनाई देता, वे समुद्र तट छोड़कर भजन-कीर्तन में शामिल होने चले जाते। इस कारण समुद्र देव को मौका मिला और एक बार फिर पुरी के आस-पास के गांव पानी में डूब गए।

ऐसी घटना को रोकने के लिए भगवान जगन्नाथ ने भगवान हनुमान को लोहे की बेड़ियों से बांध दिया ताकि वे भजन सुनने के बाद कहीं न जा सकें। तब से वे समुद्र के किनारे पुरी

मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा अत्यंत भव्य है। उनके दाहिने हाथ में गदा और बाएं हाथ में लड्डू

मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण और मां सीता की प्रतिमाएं भी हैं। मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में सूर्यवंशी गजपति राजाओं द्वारा कराया गया था और इसकी दीवारों तथा गुंबदों पर पारंपरिक उड़िया शैली की झलक दिखाई देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षा और विश्वास का स्रोत भी है। इस प्रकार के अद्भुत स्थलों का संरक्षण और प्रचार करना अनिवार्य है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी संस्कृति को समझ सकें।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेड़ी हनुमान मंदिर कहाँ स्थित है?
बेड़ी हनुमान मंदिर उड़ीसा के पुरी समुद्र तट के पास चक्र तीर्थ रोड पर स्थित है।
भगवान हनुमान को जंजीरों में क्यों बांधा गया?
भगवान हनुमान को समुद्र देवता को रोकने के लिए जंजीरों में बांधा गया ताकि वे भजन-कीर्तन में शामिल होने के लिए न जा सकें।
क्या इस मंदिर में अन्य देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं?
हाँ, इस मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण और मां सीता की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।
बेड़ी हनुमान मंदिर की वास्तुकला कैसी है?
इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में सूर्यवंशी गजपति राजाओं ने कराया था और इसकी दीवारों पर पारंपरिक उड़िया शैली की झलक दिखाई देती है।
इस मंदिर की विशेषता क्या है?
इस मंदिर की विशेषता यह है कि भगवान हनुमान लोहे की जंजीरों में बंधे हुए हैं, जो इसे एक अद्वितीय धार्मिक स्थल बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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