क्या भारत ने ईरान का समर्थन कर पश्चिमी देशों को कोई संदेश दिया?

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क्या भारत ने ईरान का समर्थन कर पश्चिमी देशों को कोई संदेश दिया?

सारांश

भारत ने ईरान के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे वैश्विक राजनीति में बदलाव का संकेत मिलता है। ईरान के राजदूत ने भारत के समर्थन के लिए धन्यवाद किया है, जबकि पश्चिमी देशों ने एक विवादास्पद प्रस्ताव पेश किया। जानिए इस मुद्दे की गहराई और भारत का रुख क्या है।

Key Takeaways

  • भारत ने ईरान का समर्थन किया है।
  • पश्चिमी देशों का प्रस्ताव राजनीतिक प्रेरित था।
  • भारत ने स्पष्ट किया कि वह आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा।
  • ईरान के राजदूत ने भारत को धन्यवाद कहा।
  • वैश्विक राजनीति में बदलाव का संकेत।

तेहरान/नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शनिवार को भारत सरकार की सिद्धांत आधारित और दृढ़ समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद दिया। दरअसल, ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर पश्चिमी देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने ईरान का समर्थन किया।

ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स पर लिखा, "मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान की इस्लामिक गणराज्य का समर्थन करने के लिए भारत सरकार के सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन के लिए अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं, जिसमें एक अन्यायी और राजनीतिक प्रेरित प्रस्ताव का विरोध भी शामिल है। यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"

पश्चिमी देशों ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए इस प्रस्ताव को पेश किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से ईरान में २८ दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसक कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई, हालांकि भारत समेत ग्लोबल साउथ के कई देशों ने इसे पश्चिमी एजेंडा बताकर प्रस्ताव का विरोध किया और नो के पक्ष में वोट दिया।

प्रस्ताव के पक्ष में २५ वोट, जबकि विरोध में ७ वोट मिले। इसके अलावा १४ देशों ने अपना वोट मामले से दूरी बनाते हुए एब्स्टेन में किया।

ईरान के समर्थन में भारत का 'नो' वाला वोट वैश्विक राजनीति की डायनेमिक्स में बड़े बदलाव का संकेत देता है। ईरान के खिलाफ इस प्रस्ताव में फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, चिली और कोस्टा रिका समेत अन्य देश हैं। ऐसे में भारत का ईरान के समर्थन में खड़ा होना दो खास बातों की ओर ध्यान खींच रहा है।

पहला यह कि भारत ने एक संदेश दिया है कि वह कभी भी किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखलअंदाजी का समर्थन नहीं करेगा। यही भारत की विदेश नीति भी है। इसके साथ ही भारत ने अपने वोट से पश्चिमी देशों को संदेश दिया है कि वह इनके दबाव में किसी कीमत पर नहीं आएगा।

इस दौरान एक खास तस्वीर भी देखने को मिली। ईरान के मुद्दे पर भारत, चीन और पाकिस्तान एक ही खेमे में नजर आ रहे हैं।

विशेष रूप से ऐसे समय में, जब अमेरिका दूसरे देशों पर अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, भारत ने एक बार फिर से स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी के भी दबाव में नहीं आएगा, चाहे वह अमेरिका हो या अन्य पश्चिमी देश।

Point of View

यह स्पष्ट है कि भारत का ईरान के समर्थन में खड़ा होना हमारी विदेश नीति की स्पष्टता और संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक है। यह कदम एक मजबूत संदेश है कि भारत वैश्विक राजनीति में अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध है।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत ने ईरान के समर्थन में क्यों वोट दिया?
भारत ने ईरान के समर्थन में वोट दिया क्योंकि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी का समर्थन नहीं करता।
क्या यह प्रस्ताव राजनीतिक प्रेरित था?
हाँ, कई देशों ने इसे राजनीतिक प्रेरित और पश्चिमी एजेंडा के तहत बताया।
ईरान के राजदूत ने भारत को धन्यवाद क्यों कहा?
ईरान के राजदूत ने भारत के सैद्धांतिक और दृढ़ समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
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