1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या भारत के कर सुधार निर्णायक चरण में हैं? नीति आयोग ने परदर्शी प्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या भारत के कर सुधार निर्णायक चरण में हैं? नीति आयोग ने परदर्शी प्रणाली पर ध्यान केंद्रित किया

सारांश

भारत के कर सुधार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं, जहां नीति आयोग ने विश्वास-आधारित प्रणाली को पुख्ता करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। क्या ये सुधार भारत के वित्तीय ढांचे को मजबूत करेंगे? जानें इस लेख में।

मुख्य बातें

भारत के कर सुधार में सरलीकरण और आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
विश्वास-आधारित शासन की ओर बढ़ने से राजकोषीय अखंडता बढ़ेगी।
गैर-अपराधीकरण रोडमैप की सिफारिश की गई है।
निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए ये सुधार महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख कर विशेषज्ञों की भागीदारी हुई।

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत के कर सुधार वर्तमान में एक निर्णायक चरण में हैं, और इस पर सरलीकरण, आधुनिकीकरण, और कर प्रशासन में विश्वास के एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है। यह जानकारी शुक्रवार को नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने साझा की।

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत प्रवर्तन-संचालित अनुपालन से विश्वास-आधारित शासन की ओर बढ़ रहा है, फोकस एक अनुपातिक, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रवर्तन प्रणाली पर होना चाहिए जो करदाताओं को सशक्त बनाते हुए राजकोषीय अखंडता की रक्षा करें।"

नीति आयोग ने शुक्रवार को नीति टैक्स पॉलिसी वर्किंग पेपर सीरीज-II के तहत दूसरा वर्किंग पेपर जारी किया, जिसका शीर्षक "भारत के कर परिवर्तन की ओर: गैर-अपराधीकरण और विश्वास-आधारित शासन" था।

इस वर्किंग-पेपर में आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत आपराधिक प्रावधानों का व्यापक मूल्यांकन किया गया है और उनकी आवश्यकता, आनुपातिकता और सरकार के व्यापक सुधार एजेंडे के साथ संरेखण का मूल्यांकन किया गया है।

साथ ही, इसमें दंड को तर्कसंगत बनाने, छोटे और प्रक्रियागत गैर-अनुपालनों को अपराधमुक्त करने और न्यायिक विवेकाधिकार को सुदृढ़ करने के लिए सिद्धांत-आधारित ढांचे का प्रस्ताव किया गया है।

नीति आयोग के वर्किंग-पेपर में कहा गया है कि 2025 अधिनियम में कई पुराने अपराधों को समाप्त कर दिया गया है, लेकिन 13 प्रावधानों में 35 कार्यों और गलती को आपराधिक श्रेणी में रखा गया है, जिनमें से अधिकांश में अनिवार्य कारावास का प्रावधान है।

वर्किंग-पेपर में एक सुनियोजित गैर-अपराधीकरण रोडमैप की सिफारिश की गई है, जिसमें मामूली प्रक्रियागत चूक के लिए कारावास को हटाना, धोखाधड़ी या जानबूझकर कर चोरी से जुड़े मामलों तक ही आपराधिक दंड को सीमित करना और सिविल और प्रशासनिक सजा की भूमिका को बढ़ाना शामिल है।

सुब्रह्मण्यम के अनुसार, ऐसे सुधारों से मुकदमेबाजी कम होगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के अनुरूप एक निष्पक्ष और पूर्वानुमानित कर व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।

इस कार्यक्रम में सीबीडीटी, सीबीआईसी, आईसीएआई, डीपीआईआईटी के प्रतिनिधियों और प्रमुख कर विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने नीति आयोग के कर नीति सलाहकार समूह (सीजीटीपी) के साथ मिलकर काम किया है, जिसका नेतृत्व नीति आयोग के विशिष्ट फेलो डॉ. पीएस पुनिहा और नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक संजीत सिंह कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि भारत के कर सुधारों की दिशा में उठाए गए कदम हमारे आर्थिक ढांचे के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह समय है जब भारत को वैश्विक मानकों के अनुरूप एक पारदर्शी और निष्पक्ष कर प्रणाली की आवश्यकता है। ऐसे सुधार न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएंगे, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता को भी मजबूती देंगे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के कर सुधारों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत के कर सुधारों का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल, पारदर्शी और विश्वास आधारित बनाना है।
नीति आयोग का नया वर्किंग पेपर किस विषय पर है?
नीति आयोग का नया वर्किंग पेपर "भारत के कर परिवर्तन की ओर: गैर-अपराधीकरण और विश्वास-आधारित शासन" विषय पर है।
क्या 2025 के आयकर अधिनियम में कुछ प्रावधान समाप्त हो गए हैं?
हाँ, 2025 के आयकर अधिनियम में कई पुराने अपराधों को समाप्त किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले