क्या अगले हफ्ते जीडीपी डेटा, अमेरिकी रोजगार आंकड़े और वेनेजुएला में तनाव भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे?
सारांश
Key Takeaways
- निफ्टी का संभावित रेजिस्टेंस 26,400 है।
- कमोडिटी कीमतें बढ़ रही हैं, जो जोखिम को दर्शाती हैं।
- अमेरिका के आर्थिक आंकड़े का ध्यान रखें।
- सर्विस सेक्टर की गति का पता लगाएं।
- भारतीय रुपए और डॉलर के बीच का संबंध महत्वपूर्ण है।
मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार ने नए वर्ष 2026 की शुरुआत में अच्छी तेजी के साथ कदम रखा है और पिछले तीन कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने को मिली। बीते शुक्रवार को घरेलू बाजार ने बड़ी तेजी के साथ समापन किया।
इस दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के निफ्टी ने 26,340 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया। कारोबार के अंत में निफ्टी 182 अंक (0.70 प्रतिशत) की वृद्धि के साथ 26,328.55 पर और बीएसई सेंसेक्स 573.41 अंक (0.67 प्रतिशत) की उछाल के साथ 85,762.01 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दिनों में भारतीय शेयर बाजार में हलचल बनी रह सकती है। निवेशक आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जो तय करेंगे कि बाजार का प्रवाह ऊपर की ओर जाएगा या नीचे।
कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों का सीजन नजदीक है, इसलिए निवेशकों की निगाहें कमाई के आंकड़ों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, प्रमुख मुद्राओं, और सोने-चांदी की कीमतों पर रहेंगी।
आगामी हफ्ते में बाजार की दिशा के बारे में एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि निफ्टी के लिए 26,400 पहला महत्वपूर्ण स्तर है जो तुरंत रेजिस्टेंस का कार्य करेगा। इसके बाद 26,500 और 26,600 के स्तर आ सकते हैं। वहीं, नीचे की ओर 26,200 और 26,100 पर सपोर्ट मिल सकता है। यदि निफ्टी 26,000 से नीचे चला गया, तो बाजार और गिरावट का सामना कर सकता है।
घरेलू मोर्चे पर, निवेशक एचएसबीसी सर्विसेज पीएमआई और कंपोजिट पीएमआई के अंतिम आंकड़ों पर निगाह रखेंगे, जिससे पता चलेगा कि सर्विस सेक्टर (जैसे बैंक, होटल, आईटी) में कार्य की गति कैसी है।
इसके अलावा, भारत की जीडीपी वृद्धि के आंकड़े, बैंकों के कर्ज और जमा की स्थिति, और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी ध्यान दिया जाएगा। इनसे देश की आर्थिक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
वैश्विक घटनाएं भी बाजार को प्रभावित करेंगी। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की खबरों से दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ी है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े, जैसे नौकरी से जुड़े आंकड़े (नॉन-फार्म पेरोल) और बेरोजगारी दर भी काफी महत्वपूर्ण हैं। ये संकेत देंगे कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक (फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों पर क्या निर्णय ले सकता है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा।
कमोडिटी यानी सोने और चांदी के दाम हाल के दिनों में तेजी से बढ़े हैं। इसका कारण दुनिया में बढ़ता तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग है। जब सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका अर्थ है कि लोग जोखिम से डर रहे हैं।
इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। ये सभी कारक बाजार की दिशा और दशा को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।