डेन्यूब सूखे से पाक्स परमाणु संयंत्र संकट में, 1.5 सेमी जलवृद्धि से टला बड़ा हादसा
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पूर्वी यूरोप में जारी भीषण सूखे और रिकॉर्ड गर्मी के बीच डेन्यूब नदी का जलस्तर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया, जिससे हंगरी के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र पाक्स को 4 अगस्त की तड़के पूर्ण रूप से बंद करने की नौबत आ गई। हालाँकि, रात के दौरान नदी के जलस्तर में करीब 1.5 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज होने से तत्काल ऊर्जा संकट टल गया।
मुख्य घटनाक्रम
हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर माज्यार ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार रात करीब 1:30 बजे (स्थानीय समयानुसार) पाक्स संयंत्र को पूरी तरह बंद करना 'महज कुछ मिलीमीटर' दूर रह गया था। उन्होंने कहा कि जलस्तर का गिरना रुक गया और सुबह तक लगभग 1.5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई, जिससे संयंत्र की अंतिम टरबाइन सुरक्षित रूप से चलती रही।
हंगरी टाइम्स के अनुसार, डेन्यूब में रिकॉर्ड गिरावट के कारण संयंत्र के रिएक्टरों की शीतलन (कूलिंग) के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके चलते पाक्स संयंत्र फिलहाल अपनी सामान्य क्षमता के केवल लगभग 10 प्रतिशत से कुछ अधिक पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
हंगरी के ऊर्जा मंत्री इश्तवान कपितानी ने बताया कि सरकार द्वारा लागू ऊर्जा बचत उपायों से बिजली की माँग में कमी आई है और राष्ट्रीय ग्रिड को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिली है। कॉर्पोरेट स्तर पर भी उपाय किए गए हैं — सुपरमार्केट श्रृंखला लिडल ने अपनी बेकरी शिफ्ट्स का समय बदल दिया, पेय पदार्थों के रेफ्रिजरेटर बंद कर दिए और पार्किंग में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग शाम 5 बजे तक सीमित कर दिया।
यह कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब देश में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँचने का अनुमान है।
रोमानिया में भी संकट
पड़ोसी देश रोमानिया में भी डेन्यूब के घटते जलस्तर से परमाणु ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो रहा है। रोमानियाई सरकार ने सोमवार को किए गए नियंत्रित विस्फोट के बाद नदी के प्रवाह को मोड़ने की योजना को सफल बताया, जिससे चेरनावोडा परमाणु ऊर्जा संयंत्र को जल की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी।
रोमानियाई अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट के बाद नदी के जलस्तर में लगभग दो सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। संयंत्र प्रबंधन का कहना है कि इससे अगले कुछ दिनों तक संचालन में राहत मिलेगी, हालाँकि जल प्रवाह बढ़ाने के लिए पुराने बजरों को नदी में डुबोने सहित अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं।
आम जनता और ऊर्जा आपूर्ति पर असर
मौसम विभाग के अनुसार, रोमानिया के बड़े हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की आशंका है, जिससे पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और जल संसाधनों पर दबाव और बढ़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आने वाले सूखे की चुनौती से जूझ रहा है, और परमाणु ऊर्जा की नदी-आधारित शीतलन प्रणाली की सीमाएँ उजागर हो रही हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि डेन्यूब में जलस्तर की यह गिरावट केवल ऊर्जा क्षेत्र को नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जल परिवहन और कृषि को भी प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूखे की स्थिति बनी रही, तो हंगरी और रोमानिया दोनों को बिजली आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों देशों की सरकारें स्थिति पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं।