क्या दिल्ली की जल संकट की समस्या का हल इन तीन प्रमुख परियोजनाओं में है?

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क्या दिल्ली की जल संकट की समस्या का हल इन तीन प्रमुख परियोजनाओं में है?

सारांश

दिल्ली में जल संकट की समस्या का समाधान करने के लिए लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ परियोजनाओं का प्रस्ताव है। ये परियोजनाएं यमुना नदी के जल प्रवाह को बढ़ाने और दिल्ली की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। जानिए इन परियोजनाओं के लाभ और दिल्ली की जल संकट से मुक्ति के उपाय।

Key Takeaways

  • दिल्ली में जल संकट एक गंभीर समस्या है।
  • लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ परियोजनाएं पानी की समस्या को हल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • इन परियोजनाओं से यमुना नदी का जल प्रवाह बढ़ेगा।
  • यहाँ से मिलने वाला पानी दिल्ली की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
  • परियोजनाओं के माध्यम से जल गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है।

नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में जल संकट एक पुरानी समस्या है। जैसे ही ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है, राजधानी में पानी की विकराल समस्या और बढ़ जाती है। कहीं जलापूर्ति में कमी देखी जाती है, तो कहीं पानी के टैंकरों के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। इस स्थिति को और गंभीर बनाता है यमुना नदी का घटता जल स्तर और बढ़ता प्रदूषण।

बढ़ती जनसंख्या और सीमित जल संसाधनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब तात्कालिक और अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं। राजधानी की प्यास बुझाने के लिए अब दूरदर्शिता के साथ ठोस, दीर्घकालिक और स्थायी समाधान अपनाना आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में यमुना नदी में जल प्रवाह बढ़ाने और दिल्ली की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीन प्रमुख परियोजनाएं प्रस्तावित और निर्माणाधीन हैं।

ये परियोजनाएं हैं लखवार परियोजना, रेणुकाजी परियोजना और किशाऊ परियोजना। लखवार परियोजना उत्तराखंड में स्थित है, रेणुकाजी परियोजना हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित है, जबकि किशाऊ परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर विकसित की जा रही है। इन तीनों परियोजनाओं का साझा उद्देश्य है यमुना में वर्षभर न्यूनतम जल प्रवाह बनाए रखना और दिल्ली को अतिरिक्त पेयजल उपलब्ध कराना।

ये तीनों बांध मिलकर दिल्ली की जल सुरक्षा की तस्वीर को बदल सकते हैं और इनसे मिलने वाली पानी की मात्रा राजधानी की कई वर्षों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम मानी जा रही है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यमुना नदी में सालभर न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बना रहेगा, जिससे नदी सूखने से बचेगी और उसका प्राकृतिक संतुलन कायम रहेगा।

इसके परिणामस्वरूप भूजल पर निर्भरता कम होगी और भूमिगत जल स्तर को संभालने में मदद मिलेगी। यमुना में लगातार पानी रहने से नदी की जल गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण और जलीय जीवन को नया जीवन मिलेगा।

Point of View

यह आवश्यक है कि सरकार और संबंधित प्राधिकरण ठोस और दीर्घकालिक उपाय अपनाएं। इन परियोजनाओं का निर्माण न केवल राजधानी के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक होगा। जल संसाधनों का संतुलित उपयोग और संरक्षण एक प्राथमिकता होनी चाहिए।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली में जल संकट के कारण क्या हैं?
दिल्ली में जल संकट के पीछे बढ़ती जनसंख्या, सीमित जल संसाधन और यमुना नदी का घटता जल स्तर मुख्य कारण हैं।
लखवार, रेणुकाजी और किशाऊ परियोजनाएं क्या हैं?
ये तीन प्रमुख परियोजनाएं यमुना नदी के जल प्रवाह को बढ़ाने के लिए प्रस्तावित हैं, जिससे दिल्ली को अतिरिक्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
इन परियोजनाओं के लाभ क्या होंगे?
इन परियोजनाओं से दिल्ली की जल सुरक्षा में सुधार होगा, भूजल पर निर्भरता कम होगी और यमुना नदी की जल गुणवत्ता में सुधार होगा।
क्या ये परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी?
इन परियोजनाओं की समय सीमा और प्रगति सरकार और संबंधित प्राधिकरण पर निर्भर करती है।
क्या ये परियोजनाएं पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं?
हाँ, इन परियोजनाओं से नदी का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा और जल गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा होगी।
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