क्या सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी?
सारांश
Key Takeaways
- सरकारी डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर रोक से स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा।
- नीतीश कुमार का नेतृत्व बिहार की समृद्धि के लिए अहम है।
- पश्चिम चंपारण से यात्रा की शुरुआत हुई है।
- पटना मेडिकल कॉलेज एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल है।
- सार्वजनिक सेवा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
पटना, १७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा', सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर लगाए गए प्रतिबंध और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व और सरकार के निर्णयों को बिहार के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
नीरज कुमार ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक ऐसे व्यक्तित्व हैं, जो अपने लिए नहीं बल्कि पूरे बिहार के लोगों की समृद्धि के लिए काम करते हैं।
उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार एक लीडर और चिंतक हैं। उनकी आलोचना करना आसान है, लेकिन उनके जैसा बन पाना हर किसी के बस की बात नहीं है। ठंड के मौसम में भी मुख्यमंत्री ने पश्चिम चंपारण से, जिसे गांधी का चंपारण कहा जाता है, समृद्धि यात्रा की शुरुआत की और वहां विकास की कई सौगातें दीं।"
नीरज कुमार ने ख़ास तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में लिए गए फ़ैसलों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार में मेडिकल कॉलेज और बड़े अस्पतालों की कल्पना भी मुश्किल थी। आज एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच), उसी दूरदर्शी सोच का नतीजा है।
सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक को लेकर नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टरों से उम्मीद की जाती है कि वे अपनी प्राथमिकता सरकारी सेवा को दें, ताकि आम लोगों का भरोसा और मजबूत हो सके। यह फ़ैसला बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव की हालिया बैठकों पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि इन बैठकों का औचित्य क्या है और इनमें किन लोगों को शामिल किया जा रहा है, यह भी जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए। कुछ ऐसे लोग भी इन बैठकों में शामिल हो सकते हैं, जिन पर गंभीर आरोप हैं, जो चिंता का विषय है।