क्या बिहार महिला आयोग ने आपत्तिजनक टिप्पणी पर चिंता जताई? सीएम धामी को लिखा पत्र
सारांश
Key Takeaways
- महिला आयोग की सक्रियता
- आपत्तिजनक टिप्पणी की निंदा
- तत्काल कार्रवाई की मांग
- महिलाओं की गरिमा की रक्षा
- राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
पटना, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार राज्य महिला आयोग ने बिहार की महिलाओं के प्रति की गई एक आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आयोग की अध्यक्ष अप्सरा द्वारा जारी एक कड़े पत्र में आयोग ने उत्तराखंड की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा कथित तौर पर किए गए बयान की कड़ी निंदा की है।
आयोग ने इस टिप्पणी को “बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अपमानजनक” बताते हुए कहा कि बिहार की लड़कियों को एक निश्चित राशि में “उपलब्ध” बताने वाली टिप्पणी राज्य की महिलाओं की गरिमा, आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला है।
आयोग ने कहा कि यह टिप्पणी घोर महिला-विरोधी और घृणास्पद मानसिकता को दर्शाती है और इससे बिहार भर की महिलाओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं को वस्तु के रूप में चित्रित करना सामाजिक रूप से घृणित है और संवैधानिक मूल्यों, महिलाओं के अधिकारों और बुनियादी सामाजिक नैतिकता का उल्लंघन करता है।
पत्र में आगे कहा गया कि यह विशेष रूप से चिंताजनक है कि ऐसा बयान कथित तौर पर महिला सशक्तीकरण और बाल विकास की जिम्मेदारी संभाले हुए मंत्री के परिवार के किसी सदस्य द्वारा दिया गया है।
बिहार राज्य महिला आयोग ने उत्तराखंड सरकार से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और त्वरित, सख्त और अनुकरणीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। आयोग ने यह भी मांग की कि कार्रवाई का विवरण बिना किसी देरी के आयोग को सूचित किया जाए।
आयोग ने कहा कि बिहार की महिलाएं दृढ़ता, आत्मसम्मान और मेहनत की प्रतीक हैं और उन्होंने शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, खेल और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आयोग ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों के माध्यम से उन्हें अपमानित करने का कोई भी प्रयास अस्वीकृत, गैरकानूनी और सामाजिक रूप से हानिकारक है।
इस घटना ने बिहार के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कई महिला संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज समूहों ने इस बयान की निंदा करते हुए जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।