बिहार की महिला उद्यमियों ने महिला आरक्षण विधेयक पर खुशी जताई, कहा- अवसरों में होगी बढ़ोतरी
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
- बिहार की महिलाएं इसके माध्यम से नए अवसरों की आशा कर रही हैं।
- महिलाओं को आरक्षण मिलने से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
- यह विधेयक सभी पार्टी की महिलाओं को समान अवसर देगा।
- महिलाएं अपने बलबूते पर निर्णय लेने में सक्षम होंगी।
भागलपुर, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाए जाने की दिशा में बिहार की कई महिला उद्यमियों और समाजसेवियों ने केंद्र सरकार के निर्णय पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इस विधेयक को महिलाओं के सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि जब महिलाओं को मौके मिलते हैं, तो वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हटतीं।
महिला उद्यमी प्रिया सोनी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "महिलाओं को वास्तव में आरक्षण की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अगर हमें अवसर दिए जाएं, तो हम किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हटते। आप निर्मला सीतारमण जैसी नेताओं को देख सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, देश ने मजबूती से विकास किया है। यदि हमें अवसर प्राप्त होते हैं, तो यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे महिलाओं को और अधिक अवसर मिलेंगे।"
सामाजिक कार्यकर्ता रूपाली ने कहा, "हम पीएम मोदी सरकार के निर्णयों से बेहद खुश हैं, क्योंकि महिलाओं को आरक्षण प्राप्त हुआ है, जिससे हमें अपना प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है। अब हर पार्टी की महिलाएं हर क्षेत्र और स्तर पर भाग ले सकती हैं और अपना प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।"
लायंस क्लब की सचिव नीलम अग्रवाल ने कहा, "मेरा मानना है कि यह एक बहुत अच्छा निर्णय है, क्योंकि इससे महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। भारत में कई योग्य महिलाएं हैं जो बेहतरीन कार्य कर सकती हैं, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिलते। यह उन्हें वह अवसर देगा। अक्सर, महिलाएं अपने पति या बेटों की सहायता से आगे बढ़ती हैं, लेकिन यदि वे अपने बलबूते सफल हो पाती हैं, तो यह और भी बेहतर होगा।"
शोभा अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 33 प्रतिशत आरक्षण का निर्णय लिया है, जो बहुत अच्छा है। अब तक महिलाओं को सही अवसर नहीं मिल पाता था। आज की आवश्यकता है कि महिलाएं अपने बलबूते पर खड़ी होकर निर्णयों में भाग लें।