20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संविधान दिवस पर सपा मेनिफेस्टो: BJP सांसद बोले — 'आंबेडकर का अपमान करने वाले उस दिन का इस्तेमाल न करें'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संविधान दिवस पर सपा मेनिफेस्टो: BJP सांसद बोले — 'आंबेडकर का अपमान करने वाले उस दिन का इस्तेमाल न करें'

सारांश

सपा ने 26 नवंबर को संविधान दिवस पर 'पीडीए का प्रण पत्र' जारी करने का ऐलान किया, तो BJP ने पलटवार करते हुए अखिलेश यादव पर आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाया। UP चुनाव से पहले दलित-पिछड़ा राजनीति की प्रतीकात्मक जंग तेज़ हो गई है।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस पर घोषणा पत्र 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' जारी करेगी।
BJP सांसद प्रकाश पाल ने अखिलेश यादव पर डॉ.
भीमराव आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया और संविधान दिवस के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि उनकी पार्टी भी जल्द मेनिफेस्टो जारी करेगी।
मसूद ने ABC कैटेगरी और 175 सीटों की बातचीत की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि चर्चा सभी 403 सीटों पर हुई है।
UP की 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सभी दलों में दलित-पिछड़ा वोटबैंक को साधने की होड़ तेज़ हो गई है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करने का निर्णय लिया है। इस घोषणा पत्र का शीर्षक 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' रखा गया है। सपा के इस ऐलान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आपत्ति जताई है।

BJP की आपत्ति: आंबेडकर और संविधान दिवस

BJP सांसद प्रकाश पाल ने सपा के इस फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर वह ऐतिहासिक दिन है जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान बनाकर देश को सौंपा था, जिसे बाद में अंगीकार किया गया और 26 जनवरी से लागू किया गया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा आरोप लगाया।

प्रकाश पाल ने कहा, 'अखिलेश यादव संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का कई बार अपमान कर चुके हैं। संविधान निर्माता का अपमान करने वाले उस दिन का प्रयोग न करें तो ज़्यादा बेहतर होगा। अगर करना ही है तो अपने घोषणा पत्र में इस बात को ज़रूर लिखें कि जो वो लिखते हैं, वो करते नहीं हैं और जो करते हैं, वो लिखते नहीं हैं।'

गौरतलब है कि UP चुनाव से पहले दलित और पिछड़ा वर्ग की राजनीति को लेकर सभी दलों में तीव्र प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। ऐसे में आंबेडकर के नाम पर उठा यह विवाद सियासी रंग अख्तियार कर सकता है।

कांग्रेस का रुख: मेनिफेस्टो जल्द, गठबंधन पर 'कोई टिप्पणी नहीं'

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बताया कि उनकी पार्टी भी शीघ्र ही अपना घोषणा पत्र जारी करेगी। हालाँकि, उन्होंने सीट-बंटवारे और गठबंधन की खबरों को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया था कि कांग्रेस ABC कैटेगरी बनाकर सीटें बाँट रही है और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा इस प्रक्रिया की अगुवाई कर रही हैं। इस पर मसूद ने पूछा, 'ये सूत्र कौन हैं? यह जानकारी कहाँ से आ रही है? हमें कोई अंदाज़ा नहीं है। ये हमारी पार्टी के अंदरूनी मामले हैं।'

मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन की बातचीत केवल 175 सीटों पर नहीं, बल्कि सभी 403 सीटों पर हुई है। उन्होंने कहा, 'प्रियंका गांधी वाड्रा हमारे देश और हमारी पार्टी की नेता हैं। गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा और मज़बूत टक्कर देगा।'

UP चुनाव की पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल सक्रिय हो गए हैं। सपा का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का राजनीतिक फॉर्मूला इस बार उनकी रणनीति का केंद्र बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब BJP भी दलित और पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुटी है।

सपा द्वारा संविधान दिवस जैसे प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण दिन को घोषणा पत्र जारी करने के लिए चुनना एक सुनियोजित संदेश लगता है — खासकर दलित और बहुजन मतदाताओं को। BJP की प्रतिक्रिया इसी संदेश को उलटने की कोशिश मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

26 नवंबर 2026 को सपा का 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' जारी होने के बाद UP की सियासी बहस और तेज़ होने की संभावना है। कांग्रेस के मेनिफेस्टो का समय और गठबंधन की अंतिम रूपरेखा अभी सामने आनी बाकी है। विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी एकता और सीट-बंटवारे का फॉर्मूला ही तय करेगा कि BJP को कितनी कड़ी चुनौती मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दलित और बहुजन मतदाताओं को सीधे संबोधित करता है। BJP की प्रतिक्रिया भी उतनी ही प्रतीकात्मक है — आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर वह उसी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है जिसे सपा साधना चाहती है। विडंबना यह है कि दोनों दल एक ही दिन को अपने-अपने राजनीतिक हित में भुनाने की जुगत में हैं। असली सवाल यह है कि क्या घोषणा पत्रों में किए गए वादे — चाहे वो किसी भी दिन जारी हों — ज़मीनी बदलाव ला सकते हैं, जबकि UP में दलित और पिछड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति दशकों की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद बुनियादी तौर पर नहीं बदली है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा का 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' क्या है?
यह समाजवादी पार्टी का UP विधानसभा चुनाव 2027 के लिए घोषणा पत्र है, जिसे 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के मौके पर जारी किया जाएगा। इसका फोकस पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग के मुद्दों पर है।
BJP ने सपा के मेनिफेस्टो पर आपत्ति क्यों जताई?
BJP सांसद प्रकाश पाल ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने कई बार संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का अपमान किया है। उनका कहना है कि जो व्यक्ति आंबेडकर का सम्मान नहीं करता, उसे उनकी विरासत से जुड़े संविधान दिवस का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए।
26 नवंबर को संविधान दिवस क्यों मनाया जाता है?
26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार संविधान को अंगीकार किया था। इसे 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया, जो गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कांग्रेस का UP चुनाव को लेकर क्या रुख है?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बताया कि पार्टी जल्द अपना मेनिफेस्टो जारी करेगी। उन्होंने ABC कैटेगरी और 175 सीटों की बातचीत की मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन सभी 403 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेगा।
UP विधानसभा चुनाव 2027 में कितनी सीटें हैं?
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। 2027 के चुनाव में सपा, कांग्रेस और BJP सहित सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं, हालाँकि अभी चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. कल
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले