संविधान दिवस पर सपा मेनिफेस्टो: BJP सांसद बोले — 'आंबेडकर का अपमान करने वाले उस दिन का इस्तेमाल न करें'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करने का निर्णय लिया है। इस घोषणा पत्र का शीर्षक 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' रखा गया है। सपा के इस ऐलान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आपत्ति जताई है।
BJP की आपत्ति: आंबेडकर और संविधान दिवस
BJP सांसद प्रकाश पाल ने सपा के इस फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर वह ऐतिहासिक दिन है जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान बनाकर देश को सौंपा था, जिसे बाद में अंगीकार किया गया और 26 जनवरी से लागू किया गया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा आरोप लगाया।
प्रकाश पाल ने कहा, 'अखिलेश यादव संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का कई बार अपमान कर चुके हैं। संविधान निर्माता का अपमान करने वाले उस दिन का प्रयोग न करें तो ज़्यादा बेहतर होगा। अगर करना ही है तो अपने घोषणा पत्र में इस बात को ज़रूर लिखें कि जो वो लिखते हैं, वो करते नहीं हैं और जो करते हैं, वो लिखते नहीं हैं।'
गौरतलब है कि UP चुनाव से पहले दलित और पिछड़ा वर्ग की राजनीति को लेकर सभी दलों में तीव्र प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। ऐसे में आंबेडकर के नाम पर उठा यह विवाद सियासी रंग अख्तियार कर सकता है।
कांग्रेस का रुख: मेनिफेस्टो जल्द, गठबंधन पर 'कोई टिप्पणी नहीं'
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बताया कि उनकी पार्टी भी शीघ्र ही अपना घोषणा पत्र जारी करेगी। हालाँकि, उन्होंने सीट-बंटवारे और गठबंधन की खबरों को लेकर सतर्क रुख अपनाया।
सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया था कि कांग्रेस ABC कैटेगरी बनाकर सीटें बाँट रही है और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा इस प्रक्रिया की अगुवाई कर रही हैं। इस पर मसूद ने पूछा, 'ये सूत्र कौन हैं? यह जानकारी कहाँ से आ रही है? हमें कोई अंदाज़ा नहीं है। ये हमारी पार्टी के अंदरूनी मामले हैं।'
मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन की बातचीत केवल 175 सीटों पर नहीं, बल्कि सभी 403 सीटों पर हुई है। उन्होंने कहा, 'प्रियंका गांधी वाड्रा हमारे देश और हमारी पार्टी की नेता हैं। गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा और मज़बूत टक्कर देगा।'
UP चुनाव की पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल सक्रिय हो गए हैं। सपा का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का राजनीतिक फॉर्मूला इस बार उनकी रणनीति का केंद्र बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब BJP भी दलित और पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुटी है।
सपा द्वारा संविधान दिवस जैसे प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण दिन को घोषणा पत्र जारी करने के लिए चुनना एक सुनियोजित संदेश लगता है — खासकर दलित और बहुजन मतदाताओं को। BJP की प्रतिक्रिया इसी संदेश को उलटने की कोशिश मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
26 नवंबर 2026 को सपा का 'सत्ताइस का संकल्प — पीडीए का प्रण पत्र' जारी होने के बाद UP की सियासी बहस और तेज़ होने की संभावना है। कांग्रेस के मेनिफेस्टो का समय और गठबंधन की अंतिम रूपरेखा अभी सामने आनी बाकी है। विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी एकता और सीट-बंटवारे का फॉर्मूला ही तय करेगा कि BJP को कितनी कड़ी चुनौती मिलती है।