भाजपा किसान मोर्चा यूपी: 77 जिलाध्यक्ष घोषित, छह संगठनात्मक क्षेत्रों में नई टीम
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने किसान वर्ग के बीच अपनी जड़ें और मजबूत करने के लिए 12 अक्टूबर 2026 को भाजपा किसान मोर्चा के 77 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की घोषणा की। यह सूची लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय से जारी की गई, जिसमें प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों — पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर — में नई टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नियुक्ति की प्रक्रिया
किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अनुमति के बाद सोमवार को यह सूची जारी की। पार्टी के अनुसार इन नियुक्तियों का उद्देश्य संगठनात्मक ढाँचे को सुदृढ़ करना और प्रदेशभर में किसान मोर्चे की गतिविधियों को नई गति देना है।
पश्चिम और ब्रज क्षेत्र की नियुक्तियाँ
पश्चिम क्षेत्र में रामपुर से ऋषि पाण्डेय, शामली से संजीव मलिक, सहारनपुर महानगर से अरुण प्रताप सिंह, मेरठ महानगर से अक्षय भड़ाना, गाजियाबाद महानगर से देवेन्द्र यादव और नोएडा महानगर से मुक्तानन्द शर्मा को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। ब्रज क्षेत्र में आगरा महानगर की कमान रवि राजपूत को, बरेली जिले में सतेन्द्र यादव, शाहजहांपुर महानगर में विजय चौहान और पीलीभीत में शरद पाल को सौंपी गई है।
कानपुर, अवध और काशी क्षेत्र
कानपुर क्षेत्र में कानपुर उत्तर से शैलेन्द्र सिंह, कानपुर दक्षिण से अजय प्रताप सिंह, झांसी महानगर से देवेन्द्र राय और हमीरपुर से अमित सिंह उर्फ चुनमुन को जिम्मेदारी दी गई है। अवध क्षेत्र में लखनऊ महानगर की कमान जितेन्द्र सिंह को, जबकि लखनऊ जिले की विमलेश मिश्रा को सौंपी गई है। अयोध्या महानगर में अनुराग त्रिपाठी और उन्नाव में कमल बाजपेयी नए जिलाध्यक्ष होंगे। काशी क्षेत्र में वाराणसी महानगर से राजेन्द्र सिंह पटेल, गाजीपुर से धनंजय चौबे, प्रयागराज महानगर से मंजीत कुशवाहा और सुल्तानपुर से कालीसहाय पाठक को नियुक्त किया गया है।
गोरखपुर क्षेत्र और व्यापक संदर्भ
गोरखपुर क्षेत्र में गोरखपुर महानगर से जीतेन्द्र सैनी, देवरिया से काशीपति शुक्ला, बलिया से अभिजीत तिवारी बब्लू और बस्ती से वरुण कुमार पाण्डेय को संगठन की बागडोर सौंपी गई है। यह संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ पहले से ही जोर पकड़ने लगी हैं और कृषि क्षेत्र में पार्टी की पकड़ को लेकर राजनीतिक चर्चाएँ तेज हैं। गौरतलब है कि 77 जिलों में एक साथ नई नियुक्तियाँ जारी करना किसान मोर्चे के पुनर्गठन की दिशा में एक व्यापक कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह नई टीम जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है, यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा।