यूपी 2027 चुनाव की तैयारी: भाजपा ने 6 क्षेत्रीय प्रभारी नियुक्त किए, एमएलसी गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय की कमान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 8 अगस्त 2026 को संगठन का व्यापक पुनर्गठन किया। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा जारी सूची में 6 क्षेत्रीय प्रभारी, 7 मोर्चा प्रभारी और मुख्यालय तथा मीडिया प्रबंधन के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियाँ तय की गई हैं।
क्षेत्रीय संगठन का नया ढाँचा
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को 6 क्षेत्रों में विभाजित कर वरिष्ठ नेताओं को कमान सौंपी है। पश्चिम क्षेत्र की जिम्मेदारी प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान को, ब्रज क्षेत्र की प्रदेश महामंत्री गीता शाक्य को और कानपुर क्षेत्र की प्रदेश महामंत्री शंकर लोधी को दी गई है।
अवध क्षेत्र के प्रभारी प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल, काशी क्षेत्र के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह और गोरखपुर क्षेत्र के प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा को बनाया गया है। गौरतलब है कि यह क्षेत्रीय विभाजन 2022 के चुनाव अभियान के दौरान अपनाई गई रणनीति की ही अगली कड़ी है।
सात मोर्चों पर नए प्रभारी
संगठन ने सामाजिक और वर्गीय आधार पर सात मोर्चों के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए हैं। युवा मोर्चा की कमान प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी, पिछड़ा मोर्चा की प्रदेश महामंत्री संजय राय और अनुसूचित मोर्चा की डॉ. धर्मेंद्र सिंह को सौंपी गई है।
महिला मोर्चा के प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, अनुसूचित जनजाति मोर्चा की डॉ. प्रियंका रावत, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कोरी और किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर गिरी को बनाया गया है। यह व्यापक सामाजिक охват भाजपा की 'सबका साथ' रणनीति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश है।
मुख्यालय और मीडिया प्रबंधन
संगठन के मुख्यालय स्तर पर एमएलसी एवं पूर्व प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी की अहम जिम्मेदारी दी गई है। मीडिया और जनसंपर्क की बागडोर प्रदेश मंत्री यतेन्द्र शर्मा के हाथों में सौंपी गई है।
इसके अतिरिक्त प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक, प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना मिश्रा को 'मन की बात' का संयोजक और प्रदेश मंत्री राहुल वाल्मीकि को 'मन की बात' का सह-संयोजक नियुक्त किया गया है।
चुनावी संदर्भ और रणनीतिक महत्व
यह पुनर्गठन ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में लगभग डेढ़ साल से भी कम का समय बचा है। भाजपा पिछले दो चुनावों में प्रचंड बहुमत से सत्ता में लौटी है और इस बार भी संगठनात्मक मजबूती को अपनी प्राथमिकता बना रही है। विपक्षी समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के गठजोड़ की चुनौती को देखते हुए भाजपा का यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इन प्रभारियों की सक्रियता ही बताएगी कि जमीनी संगठन कितना चुस्त-दुरुस्त है।