क्या भाजपा ने राजद के 'जंगलराज' को उजागर करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में पोस्टर लगाए?

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क्या भाजपा ने राजद के 'जंगलराज' को उजागर करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में पोस्टर लगाए?

सारांश

पटना में भाजपा ने अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में राजद के जंगलराज को उजागर करने वाले पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों में अपराधों, नरसंहारों और अपहरणों का उल्लेख है, जो राजद के शासनकाल की असफलताओं को दर्शाते हैं। जानिए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया।

मुख्य बातें

राजद के शासनकाल में अपराधों की बाढ़ आई थी।
भाजपा ने इस मुद्दे को उजागर करने के लिए पोस्टर लगाए।
नित्यानंद राय ने जंगलराज के दौरान हुई घटनाओं का विवरण दिया।

पटना, 5 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार को पोस्टरों से पूरी तरह ढक दिया गया है। इन पोस्टरों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासनकाल (1990-2005) में हुई आपराधिक घटनाओं, नरसंहारों, अपहरणों और उग्रवादी हमलों का उल्लेख किया गया है। इन पोस्टरों में समाचार पत्रों की कटिंग भी शामिल हैं, जो राजद के कार्यकाल की गंभीर असफलताओं और अपराधों को उजागर करती हैं।

पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राजद की आलोचना करते हुए कहा कि राजद का शासनकाल (1990-2005) बिहार के लिए एक दुर्भाग्य था। उन्होंने बताया कि उस दौरान जंगलराज में हत्या, अपहरण, नरसंहार और बलात्कार सामान्य थे।

नित्यानंद राय ने कहा, "1990 से 2005 तक राबड़ी-लालू का शासन जंगलराज के रूप में जाना जाता था। उस समय 32,000 से अधिक अपहरण की घटनाएं हुईं। स्कूल के बच्चों, बहन-बेटियों, डॉक्टरों, इंजीनियरों, व्यापारियों और किसानों का अपहरण किया जाता था। उस जंगलराज में अपहरण का एक उद्योग बन गया था।"

उन्होंने बताया, "उस जंगलराज में 18,136 हत्याएं की गईं। यह केवल सरकारी आंकड़ा है, असल में हत्याओं की संख्या लाखों में थी। सभी जानते हैं कि उस समय बिहार में एफआईआर तक दर्ज नहीं होती थीं।"

bihar की जनता को याद दिलाते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि 1990 से 2005 के बीच बिहार में 59 बड़े नरसंहार हुए, जिसमें 600 से अधिक लोगों की हत्या हुई। उन्होंने बताया कि राजद के शासनकाल में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी मारे गए थे।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने आगे कहा, "उस समय बूथ पर गरीबों को जाने से रोका जाता था। बूथों को लूट लिया जाता था और अगर कोई प्रतिकार करता था या अपने अधिकार का उपयोग करने की कोशिश करता था, तो राजद के कार्यकर्ता उसकी हत्या कर देते थे।"

नित्यानंद राय ने यह भी कहा कि उन चुनावों में 50 ईमानदार पुलिस अधिकारियों की हत्याएं की गईं। वे बूथ लूटने से रोकने या लोगों की मदद करना चाहते थे, लेकिन ऐसे अधिकारियों की हत्या कर दी जाती थी।

उन्होंने बताया कि राजद के जंगलराज में सबसे ज्यादा पीड़ित गरीब थे। महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार होते थे। नित्यानंद राय ने आरोप लगाया, "आश्चर्य तब होता है, जब सभी अपराधियों को संरक्षण देने वाली राजद की सरकार और मुख्यमंत्री आवास होते थे। फिरौती के लिए अपहरण किया जाता था, तब उसकी पंचायत मुख्यमंत्री आवास और मंत्रियों के घर पर होती थी, तो सोचें इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नित्यानंद राय ने कहा कि उस समय रात तो रात, दिन में भी लोग घर से निकलने में डरते थे। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव का जंगलराज आज भी लोगों के मन में डर पैदा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का ये दौर सिर्फ राजनीति का एक हिस्सा है। लेकिन जब भी हम अतीत के जंगलराज की बात करते हैं, तो हमें यह भी देखना चाहिए कि ऐसे समय में समाज में क्या बदलाव आया है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजद के जंगलराज के दौरान क्या हुआ?
राजद के शासनकाल में हत्या, अपहरण, नरसंहार और बलात्कार की कई घटनाएं हुईं।
भाजपा ने पोस्टर क्यों लगाए?
भाजपा ने राजद के जंगलराज को उजागर करने के लिए पोस्टर लगाए ताकि जनता को उनकी असफलताओं का एहसास हो सके।
नित्यानंद राय ने क्या कहा?
नित्यानंद राय ने कहा कि राजद का शासनकाल बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण था और उस समय अपराध का तांडव था।
राष्ट्र प्रेस
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