अमृतधारा: तीन शक्तिशाली तत्वों से बनी जादुई औषधि, सिरदर्द और माइग्रेन का उत्तम समाधान
सारांश
Key Takeaways
- अमृतधारा सिरदर्द और माइग्रेन के लिए प्रभावी है।
- यह पारंपरिक औषधि सरलता से तैयार की जा सकती है।
- गर्भवती महिलाएं इसे उपयोग करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
- इसका स्वाद तीखा और सुगंधित होता है।
- इसे लंबे समय तक खुला न रखें।
नई दिल्ली, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय परिवारों में सदियों से ऐसे पारंपरिक उपचार मौजूद हैं, जिनका प्रयोग स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में किया जाता रहा है।
उनमें से एक है अमृतधारा, जो प्राचीन काल से हमारे घरों में उपयोग की जाती रही है। इसका उपयोग सिरदर्द, अचानक घबराहट और मतली जैसी समस्याओं में किया जाता है, लेकिन आजकल यह औषधि धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है।
मुख्यतः भीमसेनी कपूर, सत पुदीना और सत अजवाइन जैसे प्रभावी और सुगंधित तत्वों से बनी यह घरेलू औषधि छोटी मात्राओं में उपयोग की जाती है और सामान्य शारीरिक समस्याओं में सहायक मानी जाती है। सिरदर्द, घबराहट और मतली से शरीर कमजोर हो जाता है, जिससे रक्तचाप भी गिर सकता है। इस स्थिति में सभी आयु के लोग अमृतधारा का उपयोग कर सकते हैं।
अमृतधारा शरीर को ठंडक पहुंचाने का कार्य करता है और सिरदर्द, माइग्रेन, अपच, मितली, बेचैनी और सर्दी-जुकाम में राहत पहुंचाता है। इसे तैयार करना बेहद आसान है। एक कांच की बोतल में कपूर सत्व, अजवाइन सत्व और पुदीना सत्व को मिलाकर बंद कर दें। इसे हल्का हिलाएं और प्रभावित स्थान पर लगाएं। इन तीनों तत्वों का एक साथ मिलकर औषधि का निर्माण होता है। ध्यान रहे इसे कान, नाक और आंख में डालने से बचें।
अमृतधारा का स्वाद तीखा और सुगंधित होता है। इसे लंबे समय तक खुला न रखें, क्योंकि यह वाष्पीकरण योग्य द्रव है और हवा के संपर्क में आते ही उड़ सकता है।
यदि सिर में दर्द हो तो इसे सीधे माथे पर लगाएं, दांत दर्द के मामलों में प्रभावित स्थान पर रुई की सहायता से लगाएं और पेट की समस्याओं में थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करें। यदि मुख से दुर्गंध आती है, तो पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी आराम मिलता है। गर्भवती महिलाएं और बच्चे इसे इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यदि लगाने पर जलन होती है, तो इसके उपयोग से बचें।