भाजपा ने बंगाल में संविदा कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति पर उठाया सवाल
सारांश
Key Takeaways
- संविदा कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति पर भाजपा का आरोप।
- चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन।
- भाजपा ने तत्काल रोक लगाने की मांग की।
- सेक्टर स्तर के संवेदनशील कार्यों में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की तैनाती पर रोक।
- निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
कोलकाता, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा ने शनिवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को संबोधित एक पत्र भेजा है, जिसमें कोलकाता के कसबा विधानसभा क्षेत्र में संविदा कर्मचारियों की सेक्टर अधिकारी और सहायक के रूप में की गई अवैध नियुक्ति पर ध्यान आकर्षित किया गया है।
भाजपा ने पत्र में उल्लेख किया कि रिटर्निंग ऑफिसर पूर्णिमा डे द्वारा जारी एक आदेश के माध्यम से, कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को ‘सेक्टर असिस्टेंट’ और ‘असिस्टेंट सेक्टर ऑफिसर’ के पदों पर नियुक्त किया गया है। यह कदम स्पष्ट रूप से तय नियमों का उल्लंघन करता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
भाजपा ने कहा कि पत्र में जिन नामों का उल्लेख है, वे पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के तहत आईएसजीपीपी सेल के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हैं, जो वर्तमान में दक्षिण 24 परगना जिला परिषद से जुड़े हुए हैं।
भाजपा ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सेक्टर स्तर पर संवेदनशील चुनावी कार्यों में तैनात करना सख्त मना है, क्योंकि इनके पास स्थायी सरकारी कर्मचारियों की तरह संस्थानिक जवाबदेही और सेवा सुरक्षा का अभाव होता है।
भाजपा ने कहा कि ‘सेक्टर असिस्टेंट’ और ‘असिस्टेंट सेक्टर ऑफिसर’ जैसे पदों का चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त पदानुक्रम के अनुसार कोई अस्तित्व नहीं है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि ऐसे पद जानबूझकर जांच से बचने के लिए बनाए गए हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि इन्हें पहले 'सेक्टर ऑफिसर' के रूप में नामित किया गया था, और शायद आपत्तियों के उठने के बाद ही, बिना किसी ठोस बदलाव के उनके पद बदल दिए गए।
भाजपा ने कहा कि ऐसे कदम आदर्श आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन हैं और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को खतरे में डालते हैं। भाजपा ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि इस आदेश के कार्यान्वयन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
पार्टी ने कहा कि 149-कसबा विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर के खिलाफ स्पष्ट पेशेवर कदाचार और पक्षपात के लिए कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए चुनाव से जुड़े सभी कार्यों में केवल योग्य और स्थायी सरकारी अधिकारियों को ही तैनात किया जाए।