क्या भाजपा सहयोगी दलों को तोड़ने की कार्रवाई तेज कर सकती है?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा की सहयोगी दलों में असंतोष बढ़ रहा है।
- नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की योजना हो रही है।
- उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में टूट की आशंका है।
- भाजपा अपने सहयोगी दलों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
- राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखनी होगी।
पटना, 28 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की सत्ताधारी एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में विधायकों की असंतोष की खबरों के बीच, राष्ट्रीय जनता दल ने भाजपा पर सहयोगियों को तोड़ने की कार्रवाई में तेजी लाने की आशंका व्यक्त की है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने रविवार को कहा कि भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की योजना तैयार कर ली है।
मृत्युंजय तिवारी ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोशिश कर रही है। इसलिए वह अपने सहयोगी दलों को तोड़ने की कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को तोड़ने का काम शुरू कर दिया है। तीन विधायकों को तोड़ा जा रहा है, यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इस तरह से भाजपा की गतिविधियाँ चल रही हैं, बहुत जल्द यह स्पष्ट होगा कि नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाकर भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाएगी।
राजद प्रवक्ता ने यह दावा किया कि इस योजना की रूपरेखा पहले से ही तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अपने सभी सहयोगी दलों को तोड़ने का प्रयास करेगी।
वास्तव में, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में टूट की आशंका जताई जा रही है। पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें भी सामने आ रही हैं। बताया गया कि उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित 'लिट्टी पार्टी' में तीन विधायक अनुपस्थित रहे। 'लिट्टी पार्टी' में उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी और सासाराम से विधायक स्नेहलता शामिल हुईं। वहीं, अनुपस्थित रहने वालों में विधायक माधव आनंद, आलोक कुमार सिंह और रामेश्वर महतो शामिल हैं।
यह ध्यान देने वाली बात है कि जिस दिन यह पार्टी आयोजित की गई, उसी दिन इन तीनों विधायकों ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से दिल्ली में मुलाकात की थी।