बंगाल निकाय चुनाव से पहले कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ईवीएम से पुराना डेटा हटाने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (WBEC) को निर्देश दिया कि राज्य में आगामी शहरी निकाय चुनावों — जिनमें कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम भी शामिल हैं — से पहले पिछले चुनावों में उपयोग की गई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से पुराना डेटा हटाया जाए। यह आदेश तब आया जब आयोग ने स्वयं न्यायालय को बताया कि उसके पास नवंबर में होने वाले चुनावों के लिए पर्याप्त ईवीएम उपलब्ध नहीं हैं।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस रवींद्र विट्ठलराव घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच ने यह स्पष्ट किया कि आदेश सर्वव्यापी नहीं है। KMC के तीन विशेष वार्डों और पूर्वी मिदनापुर जिले की कोंटाई नगर पालिका से जुड़े मामलों में प्रयुक्त ईवीएम का डेटा संरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। इन मामलों में कानूनी विवाद अभी विचाराधीन हैं।
गौरतलब है कि 12 अक्टूबर की पिछली सुनवाई में बेंच ने WBEC से पूछा था कि क्या विवादास्पद ईवीएम का डेटा हार्ड डिस्क पर सुरक्षित किया जा सकता है और क्या पुनः उपयोग से पहले पुराने डेटा को मिटाना अनिवार्य है। आयोग ने अदालत को बताया कि पुराना डेटा हटाना तकनीकी रूप से संभव है।
आयोग की स्थिति और न्यायालय का हस्तक्षेप
WBEC ने न्यायालय के समक्ष यह स्वीकार किया कि पिछले चुनावी मामलों से जुड़ी कई ईवीएम को कानूनी प्रक्रिया के चलते संरक्षित रखा गया था, जिससे नई तैनाती के लिए मशीनों की भारी कमी हो गई। इसी कारण आयोग ने उन ईवीएम का डेटा हटाकर उन्हें पुनः उपयोग में लाने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता बिलाबियल भट्टाचार्य ने बुधवार को अदालत को स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन आदेश केवल कोंटाई नगर पालिका के कुछ विशेष वार्डों तक सीमित था, जबकि अन्य नगर पालिकाओं से जुड़े मामले कलकत्ता हाई कोर्ट में विचाराधीन थे। इस स्पष्टीकरण के आधार पर डिवीजन बेंच ने अपना आदेश पारित किया।
आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में कई शहरी नगर निकायों के चुनाव नवंबर 2026 में होने हैं और परिणामों की घोषणा दिसंबर 2026 में अपेक्षित है। ये चुनाव राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनमें कोलकाता और हावड़ा जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों की नगर निगमें शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
आदेश की सीमाएँ और अपवाद
डिवीजन बेंच का आदेश स्पष्ट रूप से दो श्रेणियों में विभाजित है। जहाँ अधिकांश ईवीएम से डेटा हटाने की अनुमति दी गई है, वहीं KMC के तीन विशेष वार्डों और कोंटाई नगर पालिका से जुड़ी मशीनों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। यह सावधानी इसलिए बरती गई है ताकि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े साक्ष्यों की अखंडता बनी रहे।
क्या होगा आगे
अदालत के आदेश के बाद WBEC अब विवाद-मुक्त ईवीएम का डेटा हटाकर उन्हें निकाय चुनावों में तैनाती के लिए तैयार कर सकता है। हालांकि, KMC और कोंटाई के विशेष वार्डों से जुड़े मामलों का निपटारा अदालत में होने तक वे मशीनें संरक्षित रहेंगी। पर्यवेक्षकों के अनुसार यह फैसला न्यायालय द्वारा चुनावी प्रक्रिया और कानूनी पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।