क्या सीबीआई ने बीमा कंपनी के अधिकारी सहित चार को फर्जी बीमा दावे मामले में जेल की सजा दिलाई?
सारांश
Key Takeaways
- न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के चार अधिकारियों को सजा मिली।
- फर्जी बीमा दावों के लिए 9.81 लाख रुपये का धोखाधड़ी।
- सीबीआई ने 2004 में मामला दर्ज किया था।
- एन.के. सिंघल को मिली तीन साल की कैद।
- मामला न्यायालय में दो दशकों तक चला।
लखनऊ, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 9.81 लाख रुपये के फर्जी बीमा दावे के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के एक अधिकारी समेत चार दोषियों को अलग-अलग अवधि की जेल की सजा सुनाई है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
विशेष अदालत ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, डिवीजनल ऑफिस-III, कानपुर में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी (विकास) रहे एन.के. सिंघल को शुक्रवार को तीन साल की कैद और 2.3 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके अतिरिक्त संजय कुमार जैन और नीरज कपूर को भी तीन-तीन साल की कैद और 95-95 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है, जबकि बृजेश कनोडिया को दो साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।
सीबीआई ने इस मामले में 30 जनवरी 2004 को केस दर्ज किया था। आरोप था कि वर्ष 1999 से 2002 के दौरान कानपुर के डिवीजनल ऑफिस-III में तैनात रहते हुए एन.के. सिंघल ने कुछ अज्ञात व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर धोखाधड़ी, जालसाजी एवं आपराधिक कदाचार के अपराध किए और फर्जी बीमा दावों के माध्यम से न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को 9.81 लाख रुपये का नुकसान पहुँचाया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 30 नवंबर 2005 को एन.के. सिंघल, नीरज अग्रवाल, संजय कुमार जैन, प्रदीप कुमार दीक्षित, नीरज कपूर, अमरनाथ शुक्ला और बृजेश कनोडिया के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। एन.के. सिंघल के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत भी मुकदमा चल रहा है।
मामले में आरोपी प्रदीप कुमार दीक्षित को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।
वहीं, मुकदमे के दौरान आरोपी नीरज अग्रवाल (सहायक प्रबंधक, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, डिवीजनल ऑफिस-III, कानपुर) और अमरनाथ शुक्ला की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
करीब दो दशकों तक चली इस जांच के दौरान सीबीआई ने बीमा कंपनी से जुड़े अहम दस्तावेजों की जांच की और दोषी कर्मचारियों के सहकर्मियों के बयान भी दर्ज किए।