क्या छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी में नाव दुर्घटना से पूरा परिवार खत्म हो गया?

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क्या छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में इंद्रावती नदी में नाव दुर्घटना से पूरा परिवार खत्म हो गया?

सारांश

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक परिवार की त्रासदी से जुड़ी यह कहानी हृदय को छू लेती है। इंद्रावती नदी में नाव दुर्घटना ने कई लोगों की जान ली, और यह घटना न केवल एक परिवार को बल्कि पूरे समुदाय को प्रभावित कर गई है।

Key Takeaways

  • इंद्रावती नदी ने कई जानें ली हैं।
  • नाव दुर्घटना के दौरान परिवार के सभी सदस्य मारे गए।
  • बुनियादी ढांचे की कमी से ग्रामीणों की जिंदगी खतरे में है।
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा में सुधार हुआ है।
  • इस घटना ने पूरे समुदाय को प्रभावित किया है।

रायपुर/बीजापुर, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के दूरदराज़ बीजापुर जिले में लंबे समय से चल रही खोज के समापन पर, शनिवार को बचाव कर्मचारियों ने इंद्रावती नदी से अंतिम शव प्राप्त किया।

अंतिम पीड़ित, ७० वर्षीय भादो, दुर्घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर नीचे नदी के किनारे घनी झाड़ियों में फंसा हुआ मिला। इससे एक दिन पहले, २५ वर्षीय सुनीता कवासी का शव दुर्घटनास्थल से लगभग ५०० मीटर दूर मिला था।

इससे पहले, ४५ वर्षीय पोडिया और उनके दो वर्षीय बेटे राकेश के शव बरामद किए गए, जो एक तौलिये से बंधे हुए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि पानी में बहते बच्चों को बचाने के लिए मां ने हताशा में ऐसा किया था।

मृतकों में मां पोडिया, उसका बेटा राकेश, बहू सुनीता कवासी और राकेश के दादा भादो शामिल हैं। दो दिन पहले पोडिया और राकेश का शव एक-दूसरे से टॉवेल से बंधा हुआ मिला था, जो आखिरी पल की मां-बेटे की जद्दोजहद और बेबसी को बयान करता है।

दुख की बात यह है कि परिवार के मुखिया सन्नू को इस त्रासदी की कोई जानकारी नहीं है। वे कुछ सप्ताह पहले आंध्र प्रदेश में दिहाड़ी मजदूरी के लिए चले गए थे, और नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में खराब नेटवर्क कवरेज के कारण उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को यह दुखद खबर उन्हें बताने में परेशानी हो रही है।

यह घटना तब घटी जब समूह उस्परी में साप्ताहिक बाजार से लौट रहा था।

घने अबुझमाद जंगलों के पास माओवादी प्रभावित इस क्षेत्र में नदी पार करने के लिए कोई पुल, पक्की सड़क या वैकल्पिक मार्ग नहीं है, इसलिए ग्रामीण नदी पार करने के लिए पूरी तरह से लकड़ी की नावों पर निर्भर हैं।

लगभग एक दर्जन यात्रियों के साथ यात्रा के दौरान, नदी की तेज धारा में नाव अचानक हिल गई और पलट गई, जिससे चार लोग नदी में गिर गए।

क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि इंद्रावती नदी ने वर्षों से कई जानें ली हैं, विशेषकर बरसात के बाद के मौसम में जब यह उग्र और निर्दयी हो जाती है।

हालांकि नक्सल-विरोधी अभियानों के चलते सुरक्षा में कुछ सुधार हुआ है और अब पूर्व जोखिम भरे रास्तों पर शिविर स्थापित किए गए हैं, फिर भी बुनियादी ढांचे की निरंतर कमी इन दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में जीवन को खतरे में डालती है।

Point of View

NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

इस नाव दुर्घटना में कितने लोग मारे गए?
इस दुर्घटना में एक ही परिवार के चार सदस्य मारे गए हैं।
दुर्घटना का कारण क्या था?
नदी की तेज धारा और लकड़ी की नाव का कमजोर होना दुर्घटना का मुख्य कारण था।
क्या इस क्षेत्र में कोई पुल या सड़क है?
इस क्षेत्र में नदी पार करने के लिए कोई पुल या पक्की सड़क नहीं है, जिससे ग्रामीण नाव पर निर्भर हैं।
क्या सरकार ने इस स्थिति पर ध्यान दिया है?
हां, नक्सल-विरोधी अभियानों के चलते सुरक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी अभी भी बनी हुई है।
क्या इस घटना ने स्थानीय समुदाय पर कोई असर डाला?
इस घटना ने पूरे समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।
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