चीन ने 153 देशों के साथ 3,196 सिस्टर सिटी संबंध स्थापित किए, शीआन सम्मेलन में 'शीआन पहल' जारी
सारांश
मुख्य बातें
चीन ने अब तक 153 देशों के साथ 3,196 सिस्टर सिटी (प्रांत/राज्य) संबंध स्थापित कर लिए हैं। चीनी वैदेशिक जन मैत्री संघ द्वारा 22 अक्टूबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई। इस घोषणा के साथ ही शैनशी प्रांत के शीआन शहर में आयोजित 2026 चीन अंतर्राष्ट्रीय सिस्टर सिटी सम्मेलन का समापन हुआ।
सम्मेलन का समापन और पुरस्कार वितरण
22 अक्टूबर 2026 को शीआन में संपन्न इस सम्मेलन के समापन समारोह में दो विशेष श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। 20 चीनी प्रांतों और शहरों को 'अंतर्राष्ट्रीय सिस्टर सिटीज़ के लिए उत्कृष्ट योगदान पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वहीं 40 विदेशी प्रांतों और शहरों को 'चीन के साथ सिस्टर सिटीज़ के लिए उत्कृष्ट भागीदार पुरस्कार' दिया गया।
बारह सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर
सम्मेलन के दौरान कुल बारह सिस्टर सिटी और व्यावहारिक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते स्थानीय आर्थिक और व्यापारिक निवेश, शहरी प्रशासन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा सार्वजनिक सेवाओं जैसे कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को समेटे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी 'जन-केंद्रित कूटनीति' को वैश्विक स्तर पर और अधिक विस्तार देने में जुटा है।
'शीआन पहल' का ऐलान
सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही 'शीआन पहल' का जारी होना। इस पहल में सभी सहभागी पक्षों ने चार वैश्विक पहलों का सकारात्मक मूल्यांकन किया और सर्वसम्मति से माना कि अंतर्राष्ट्रीय सह-शहर (सिस्टर सिटीज़) विभिन्न देशों की जनता को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु हैं। पहल में यह भी कहा गया कि इन संबंधों को समय की प्रवृत्ति के अनुरूप एकजुटता और सहयोग को गहरा करते हुए मानव जाति के साझा भविष्य के निर्माण को बढ़ावा देना चाहिए।
वैश्विक संदर्भ और महत्त्व
गौरतलब है कि सिस्टर सिटी संबंध शीत युद्ध के बाद से ही देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक पुलों के रूप में काम करते रहे हैं। 153 देशों तक फैला चीन का यह नेटवर्क दुनिया के सबसे व्यापक द्विपक्षीय नगरीय कूटनीतिक ढाँचों में से एक माना जाता है। आलोचकों का कहना है कि इन संबंधों की आड़ में कभी-कभी आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव विस्तार की कोशिश भी होती है, हालाँकि समर्थक इसे सांस्कृतिक सद्भाव की मिसाल बताते हैं।
आगे की राह
'शीआन पहल' के बाद अब यह देखना होगा कि हस्ताक्षरित बारह समझौतों को ज़मीनी स्तर पर किस गति से लागू किया जाता है। नगरीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, इन समझौतों की सफलता काफी हद तक स्थानीय सरकारों की प्रतिबद्धता और संसाधन आवंटन पर निर्भर करेगी।