चीन की GDP वृद्धि 4.6%: वैश्विक अनिश्चितता के बीच तीसरी तिमाही के आंकड़े 'अनुमान से बेहतर'
सारांश
मुख्य बातें
चीन की अर्थव्यवस्था ने 2026 की पहली तीन तिमाहियों में सालाना आधार पर 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि तीसरी तिमाही में यह आंकड़ा 4.5 प्रतिशत रहा। मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक तनावों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी मीडिया ने इन आंकड़ों को 'अनुमानों से बेहतर' बताया है।
मुख्य आर्थिक आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहली तीन तिमाहियों में बड़े औद्योगिक उद्यमों का मूल्य-वर्धित उत्पादन 5.3 प्रतिशत बढ़ा। इससे भी उल्लेखनीय यह है कि उच्च तकनीक विनिर्माण में यह वृद्धि 14.3 प्रतिशत रही, जो औद्योगिक ढाँचे के बदलाव का संकेत है।
इसी अवधि में 3डी प्रिंटिंग उपकरण, लिथियम-आयन बैटरी और औद्योगिक रोबोट जैसे उत्पादों के उत्पादन में तेज़ उछाल दर्ज किया गया। हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्मार्ट विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार जारी है।
व्यापार और बाज़ार खुलेपन की स्थिति
आंकड़ों के अनुसार, पहली तीन तिमाहियों में चीन का आयात 22.3 प्रतिशत बढ़ा, जो निर्यात वृद्धि दर से अधिक रहा। यह घरेलू माँग की सक्रियता और वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के लिए बाज़ार की उपलब्धता का संकेत माना जा रहा है।
आगामी चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात मेले में 4,100 से अधिक विदेशी कंपनियाँ भाग लेंगी। यह मेला चीन की खुली बाज़ार नीति का प्रतीक माना जाता है।
घरेलू उपभोग और आय के संकेत
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहली तीन तिमाहियों में प्रति व्यक्ति वास्तविक प्रयोज्य आय 4.4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह वृद्धि 5.6 प्रतिशत रही। उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की खुदरा बिक्री में 2.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता विश्वास दबाव में है। इसके अलावा, जनवरी से अगस्त के बीच वीज़ा-मुक्त प्रवेश से आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 26.8 प्रतिशत बढ़ी।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका
चीन वैश्विक विनिर्माण केंद्र और मध्यवर्ती वस्तुओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। आलोचकों का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पुनर्गठन का दबाव बढ़ रहा है, जिसमें कई देश 'चाइना-प्लस-वन' रणनीति अपना रहे हैं। बावजूद इसके, आंकड़ों के अनुसार चीन की उत्पादन स्थिरता ने आपूर्ति बाधाओं के जोखिम को कम रखने में योगदान दिया है।
गौरतलब है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दरों में बड़ा अंतर बना हुआ है। ऐसे परिवेश में चीन की अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर को कुछ अर्थशास्त्री वैश्विक माँग के लिए संतुलनकारी कारक मानते हैं, जबकि कुछ विश्लेषक रियल एस्टेट क्षेत्र की चुनौतियों और युवा बेरोज़गारी को दीर्घकालिक जोखिम के रूप में रेखांकित करते हैं।
आगे की राह
चीन नवाचार-संचालित आपूर्ति-पक्ष सुधार, घरेलू माँग के विस्तार और बाज़ार खुलेपन की नीति के तीन स्तंभों पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष की चौथी तिमाही के आंकड़े यह तय करेंगे कि देश 5 प्रतिशत के वार्षिक विकास लक्ष्य के करीब पहुँच पाता है या नहीं।