चीन की बिजली उत्पादन क्षमता 4.01 अरब किलोवाट के पार, अमेरिका-EU-भारत सबको पीछे छोड़ा
सारांश
मुख्य बातें
चीन की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता मई 2026 के अंत तक 4.01 अरब किलोवाट के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है — यह आँकड़ा अमेरिका, यूरोपीय संघ, भारत, जापान और रूस की संयुक्त स्थापित क्षमता से भी अधिक है। चीनी राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन ने 25 जून 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की, जिसके साथ चीन वैश्विक विद्युत उत्पादन में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
मुख्य उपलब्धि और वैश्विक संदर्भ
चीन दक्षिणी विद्युत वितरण एवं नियंत्रण केंद्र के निदेशक तेंग वेइसी ने कहा कि 4 अरब किलोवाट का यह आँकड़ा ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मील का पत्थर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षमता अकेले पाँच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की सम्मिलित विद्युत क्षमता को पार कर चुकी है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चीन की असाधारण बढ़त को रेखांकित करती है।
हरित ऊर्जा में ऐतिहासिक बदलाव
इस उपलब्धि की सबसे उल्लेखनीय बात क्षमता की संरचना में आया आमूल परिवर्तन है। वर्ष 2010 में कोयला-आधारित बिजली उत्पादन की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत थी, जो मई 2026 तक घटकर 32 प्रतिशत रह गई। इसके विपरीत, गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई है, और नवीकरणीय ऊर्जा की भागीदारी 24 प्रतिशत से 61 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह बदलाव महज़ एक दशक और छह वर्षों में हुआ है, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के ऊर्जा इतिहास में विरले ही देखा गया है।
औद्योगिक और आर्थिक प्रभाव
बड़े पैमाने पर उपलब्ध और अपेक्षाकृत कम लागत वाली हरित बिजली ने चीन के औद्योगिक उन्नयन, घरेलू ऊर्जा आपूर्ति और उभरते उद्योगों — जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर — के विस्तार के लिए एक मज़बूत आधार तैयार किया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन में कमी दोनों ही प्राथमिकताएँ बन चुकी हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
चीन विद्युत उद्योग संघ के कार्यकारी उपाध्यक्ष यांग खुन के अनुसार, 4 अरब किलोवाट का यह आँकड़ा केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि का प्रतीक नहीं है — यह चीन की ऊर्जा सुरक्षा, हरित एवं निम्न-कार्बन विकास, और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई समग्र प्रगति का प्रमाण है। आलोचकों का कहना है कि कोयले की हिस्सेदारी अभी भी 32 प्रतिशत बनी हुई है, और पूर्ण कार्बन-तटस्थता का लक्ष्य अभी दूर है।
आगे की राह
चीन का लक्ष्य 2060 तक कार्बन-तटस्थता हासिल करना है। इस दिशा में नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी एक सकारात्मक संकेत है, हालाँकि ग्रिड स्थिरता और ऊर्जा भंडारण की चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में चीन की यह भूमिका आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं को भी प्रभावित करेगी।