चीन की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 400 करोड़ किलोवाट पार, अमेरिका-EU-भारत से भी आगे
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राजकीय ऊर्जा ब्यूरो के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 के अंत तक चीन की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 401 करोड़ किलोवाट तक पहुँच गई — जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। यह पहला अवसर है जब चीन ने 400 करोड़ किलोवाट का ऐतिहासिक आँकड़ा पार किया है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।
ऐतिहासिक उपलब्धि का वैश्विक संदर्भ
आंकड़ों के अनुसार, 401 करोड़ किलोवाट की यह क्षमता अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), भारत, जापान और रूस की संयुक्त स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता से भी अधिक है। यह तथ्य चीन की ऊर्जा महाशक्ति के रूप में उभरती स्थिति को रेखांकित करता है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो 2010 से 2025 के बीच चीन की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता की औसत सालाना वृद्धि दर 9.7 प्रतिशत रही — जो अमेरिका (1.7%), EU (3.2%), भारत (7.1%), जापान (2.9%) और रूस (1.2%) से काफी आगे है।
नवीन ऊर्जा की भूमिका
चीनी बिजली उद्यम संघ के सांख्यिकी और डिजिटल इंटेलीजेंस विभाग के उपनिदेशक च्यांग तेपिन ने बताया कि 400 करोड़ किलोवाट का आँकड़ा पार करना चीन के ऊर्जा विकास के तरीके में आए गहरे परिवर्तन का प्रमाण है।
उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि चीन की स्थापित क्षमता 300 करोड़ किलोवाट से 400 करोड़ किलोवाट तक पहुँचने में मात्र दो वर्ष लगे। इसका मुख्य कारण सौर ऊर्जा और पवन बिजली समेत नवीन ऊर्जा क्षेत्र में असाधारण तेज़ी से हुई वृद्धि है।
ऊर्जा सुरक्षा पर असर
च्यांग तेपिन के अनुसार, 400 करोड़ किलोवाट की यह क्षमता देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करती है। उन्होंने कहा कि चीन की बिजली खपत विश्व में सर्वाधिक है, फिर भी बिजली आपूर्ति पर्याप्त और स्थिर बनी हुई है — जो ऊर्जा सुरक्षा का प्रत्यक्ष संकेत है।
गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर देश अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर नई रणनीतियाँ बना रहे हैं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का दबाव बढ़ रहा है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा में चीन का यह आक्रामक विस्तार आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा व्यापार और जलवायु लक्ष्यों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। चीन की यह रफ़्तार बनी रही तो अगला बड़ा पड़ाव 500 करोड़ किलोवाट भी निकट भविष्य में संभव माना जा रहा है।