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चीन में नवीन ऊर्जा भारी ट्रकों की बिक्री 78.6% उछली, 2026 की पहली छमाही में 1.40 लाख यूनिट बिके

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चीन में नवीन ऊर्जा भारी ट्रकों की बिक्री 78.6% उछली, 2026 की पहली छमाही में 1.40 लाख यूनिट बिके

सारांश

चीन में 2026 की पहली छमाही में नवीन ऊर्जा भारी ट्रकों की बिक्री 78.6% उछलकर 1.40 लाख यूनिट पर पहुँची। 2,200 करोड़ के सरकारी बॉन्ड, 30,000 किमी शून्य-कार्बन मार्ग और 3,000 चार्जिंग स्टेशनों की योजना के साथ चीन भारी परिवहन क्षेत्र को तेज़ी से हरित बना रहा है।

मुख्य बातें

2026 की पहली छमाही में चीन में 1 लाख 40 हजार नवीन ऊर्जा भारी ट्रक बिके।
बिक्री में साल-दर-साल 78.6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
पुराने ट्रकों की स्क्रैपिंग योजना को 2,200 करोड़ के अति-दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड का समर्थन।
अगले चरण में 30,000 किलोमीटर शून्य-कार्बन सड़क परिवहन मार्ग विकसित किए जाएंगे।
इलेक्ट्रिक भारी ट्रकों के लिए 3,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना।

चीन के यातायात और परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में चीन में 1 लाख 40 हजार नवीन ऊर्जा भारी ट्रक बिके — जो साल-दर-साल 78.6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि चीन का भारी परिवहन क्षेत्र तेज़ी से हरित ऊर्जा की ओर करवट ले रहा है।

बिक्री में उछाल की वजह

इस वृद्धि के पीछे सरकार की एक महत्वाकांक्षी नीति है — पुराने परंपरागत ईंधन-चालित ट्रकों की स्क्रैपिंग और उनके स्थान पर नवीन ऊर्जा वाहनों को अपनाने की मुहिम। इस योजना को 2,200 करोड़ के अति-दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड से वित्तीय समर्थन दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए परिवहन क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव को प्राथमिकता दे रहा है।

बुनियादी ढाँचे का हरित रूपांतरण

मंत्रालय के अनुसार अगले चरण में 30,000 किलोमीटर के शून्य-कार्बन सड़क परिवहन मार्ग विकसित किए जाएंगे। साथ ही इलेक्ट्रिक भारी ट्रकों की चार्जिंग ज़रूरतों को पूरा करने के लिए देशभर में 3,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यह कदम यातायात अवसंरचना के व्यापक हरित रूपांतरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि चीन पहले से ही यात्री इलेक्ट्रिक वाहनों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है, और अब भारी वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में भी यही प्रवृत्ति तेज़ होती दिख रही है। भारी ट्रक परिवहन क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से डीज़ल पर निर्भर रहा है, और इसमें 78.6 प्रतिशत की वृद्धि उद्योग विशेषज्ञों के लिए उल्लेखनीय है। आलोचकों का कहना है कि चार्जिंग बुनियादी ढाँचे की गति और ग्रामीण मार्गों पर कवरेज अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

आगे क्या

शून्य-कार्बन परिवहन मार्गों और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के साथ, चीन का लक्ष्य भारी माल परिवहन को दीर्घकालिक रूप से जीवाश्म ईंधन से मुक्त करना है। इस नीति के परिणाम वैश्विक ट्रक निर्माण उद्योग और ऊर्जा बाज़ारों पर भी असर डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्क्रैपिंग अनिवार्यता और बुनियादी ढाँचे का निर्माण एक साथ चल रहे हैं। भारत सहित अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है, जहाँ भारी वाणिज्यिक वाहन अभी भी लगभग पूरी तरह डीज़ल पर निर्भर हैं। हालाँकि, 3,000 चार्जिंग स्टेशनों की योजना 30,000 किलोमीटर के नेटवर्क के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह सवाल अभी खुला है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 की पहली छमाही में चीन में कितने नवीन ऊर्जा भारी ट्रक बिके?
चीनी यातायात और परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में 1 लाख 40 हजार नवीन ऊर्जा भारी ट्रक बिके, जो साल-दर-साल 78.6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है।
चीन में पुराने ट्रकों की स्क्रैपिंग योजना को किस तरह का वित्तीय समर्थन मिल रहा है?
इस योजना को 2,200 करोड़ के अति-दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड से वित्तीय समर्थन दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य परंपरागत ईंधन-चालित ट्रकों की जगह नवीन ऊर्जा वाहनों को प्रतिस्थापित करना है।
चीन में शून्य-कार्बन परिवहन नेटवर्क की क्या योजना है?
अगले चरण में 30,000 किलोमीटर के शून्य-कार्बन सड़क परिवहन मार्ग विकसित किए जाएंगे और इलेक्ट्रिक भारी ट्रकों के लिए 3,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
चीन में नवीन ऊर्जा भारी ट्रकों की बिक्री इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रही है?
सरकार की स्क्रैपिंग नीति, सरकारी बॉन्ड से मिलने वाली वित्तीय सहायता और हरित बुनियादी ढाँचे के विस्तार ने मिलकर माँग को तेज़ किया है। इसके अलावा, चीन के कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिफिकेशन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
चीन की इस नीति का वैश्विक परिवहन बाज़ार पर क्या असर हो सकता है?
चीन के भारी ट्रक बाज़ार में इस तेज़ बदलाव से वैश्विक डीज़ल ट्रक निर्माताओं पर दबाव बढ़ सकता है और अन्य देशों को भी इसी दिशा में नीतियाँ बनाने की प्रेरणा मिल सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह एक नीतिगत संदर्भ बिंदु बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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