चीन की ताइवान में जासूसी योजनाएं: एनएसबी ने दी चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- चीन की जासूसी गतिविधियाँ संगठित और लक्षित हैं।
- एनएसबी ने निचले स्तर के सैनिकों पर ध्यान केंद्रित करने की चेतावनी दी है।
- चीन ताइवान के चुनावों में दखल देने की योजना बना रहा है।
- एआई-पावर्ड तकनीक का उपयोग करके विवादित कंटेंट फैलाने का प्रयास।
- ताइवान की सुरक्षा के लिए सक्रिय निगरानी जारी है।
ताइपे, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (एनएसबी) के महानिदेशक त्साई मिंग-येन ने कहा है कि चीन द्वारा ताइवान में घुसपैठ की कोशिशें संगठित, योजनाबद्ध और लक्षित हैं। पहले चीन का ध्यान मध्यम स्तर के सैन्य अधिकारियों पर था, लेकिन अब उसका ध्यान निचले स्तर के सैनिकों (रैंक-एंड-फाइल) की भर्ती पर केंद्रित हो गया है।
बुधवार को संसद की विदेश मामलों और राष्ट्रीय रक्षा समिति की बैठक में बोलते हुए त्साई मिंग-येन ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ताइवान में खुफिया जानकारी जुटाने और जासूसी गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, इंटेलिजेंस ऑपरेशंस और यूनाइटेड फ्रंट रणनीति का उपयोग कर रही है।
ताइवान के प्रमुख अखबार ताइपे टाइम्स के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि सीसीपी विभिन्न नेटवर्क के जरिए आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से संभावित लोगों की पहचान करती है और स्थानीय सहयोगियों को जोड़कर खुफिया तंत्र स्थापित करती है।
त्साई ने बताया कि चीन अब अपने लक्ष्यों को बदल रहा है। पहले वह मिड-लेवल सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाता था, जिनके पास संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच होती थी, लेकिन अब वह नॉन-कमीशंड अधिकारियों और सामान्य सैनिकों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन नवंबर में होने वाले ताइवान के 'नाइन-इन-वन' स्थानीय चुनावों में दखल देने की योजना बना रहा है। इसके लिए ताइवान के गवर्नमेंट सर्विस नेटवर्क पर साइबर हमले किए जा सकते हैं।
इस रिपोर्ट को विदेश मामलों और राष्ट्रीय रक्षा कमेटी में ब्यूरो की ब्रीफिंग से पहले लेजिस्लेटिव युआन को सौंपा गया था। ताइवान के खिलाफ चीन के कॉग्निटिव वॉरफेयर के बारे में ब्यूरो ने कहा कि उन्हें लगभग 13,000 संदिग्ध इंटरनेट अकाउंट और 860,000 विवादित मैसेज मिले हैं।
ब्यूरो ने बताया कि विवादित मैसेज बड़े विदेशी मामलों, राष्ट्रीय रक्षा और आर्थिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके तैयार किया गया था और चीनी सरकारी मीडिया, इंटरनेट ट्रोल, संदिग्ध अकाउंट और कंटेंट फार्म के माध्यम से साझा किया गया था।
ब्यूरो ने कहा कि 2026 की पहली तिमाही में जीएसए पर 173.28 मिलियन से अधिक बार हमला हुआ। ये क्रियाकलाप 'नाइन-इन-वन' चुनावों में चीनी दखल का हिस्सा हो सकते हैं। ये इंटेलिजेंस इकट्ठा करने, निगरानी करने और डेटा चोरी करने के उद्देश्य से बनाए गए थे।
ब्यूरो ने आगे बताया, "इस साल के अंत में होने वाले चुनावों के लिए, चीन के हाइब्रिड तरीके से दखल देने की आशंका है, जिसमें एआई-पावर्ड डीप-फेक टेक्नोलॉजी का उपयोग करके विवादित कंटेंट फैलाना, झूठे पब्लिक ओपिनियन सर्वे प्रकाशित करना और अवैध बेटिंग रिंग बनाना शामिल है।"
इसमें यह भी बताया गया है कि बीजिंग संभवतः टूरिस्टों को चीन बुलाकर, उनके आने-जाने का खर्च उठाकर और चीन के समर्थन वाले शहरों या काउंटियों से कृषि उत्पाद खरीदकर चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।
ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में चीनी मिलिट्री एयरक्राफ्ट ने ताइवान के एयरस्पेस में 420 से अधिक बार प्रवेश किया। ब्यूरो ने कहा कि इन गतिविधियों को चीनी नेवी के जहाजों के साथ समन्वय करके 10 जॉइंट कॉम्बैट रेडीनेस पेट्रोल किए गए और इसका उद्देश्य समय-समय पर ड्रिल के जरिए ताइवान के खिलाफ ऑपरेशनल क्षमता का परीक्षण करना था।