चीनी अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही में वृद्धि: उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन
सारांश
Key Takeaways
- पहली तिमाही में जीडीपी में 5 प्रतिशत की वृद्धि।
- विदेश व्यापार का आंकड़ा 118 खरब 40 अरब युआन।
- आयात में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि।
- उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि।
- सीपीआई और पीपीआई में सुधार के संकेत।
बीजिंग, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। चीनी राजकीय साख्यिकी ब्यूरो ने हाल ही में पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए। चीनी आर्थिक संचालन उम्मीद से कहीं बेहतर साबित हुआ है, जिसने इस अर्थव्यवस्था की लचीलापन और जीवंतता को उजागर किया है।
पहली तिमाही में चीन की जीडीपी में साल दर साल 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले वर्ष की चौथी तिमाही के 4.5 प्रतिशत की तुलना में स्पष्ट सुधार है। यह आंकड़ा बाजार के साधारण पूर्वानुमानों से परे है। मार्च में चीन की सरकारी कार्य रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्ष 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य 4.5 प्रतिशत से 5 प्रतिशत के बीच होगा। पहली तिमाही की वृद्धि दर ने इस लक्ष्य की ऊपरी सीमा तक पहुँचकर एक सकारात्मक शुरुआत की है और साल भर के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
इस वर्ष की शुरुआत से ही वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति में तेजी से अस्थिरता आई है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर ऊर्जा बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। चीन, जो कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, ने इस दबाव और चुनौतियों का सामना करते हुए 5 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है, जो वास्तव में आसान नहीं था।
पेइचिंग विश्वविद्यालय के क्वांगहुआ मैनेजमेंट स्कूल के महानिदेशक थ्येन श्वएं ने चाइना मीडिया ग्रुप के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि पहली तिमाही के आंकड़े अद्भुत हैं और सच में अधिकांश लोगों की अपेक्षाओं को पार कर गए हैं। वर्तमान वैश्विक आर्थिक मंदी के वातावरण में चीनी अर्थव्यवस्था की यह अच्छी शुरुआत विश्व अर्थव्यवस्था के लिए सहायक साबित होने वाली है।
5 प्रतिशत की वृद्धि के पीछे चीनी आर्थिक ढांचे का लगातार सुधार और नए विकास इंजनों का तेज विकास है। आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में चीन के साजो-सामान विनिर्माण उद्योग का अतिरिक्त मूल्य साल दर साल 8.9 प्रतिशत बढ़ा, जिसने औद्योगिक अतिरिक्त मूल्य का 35.1 प्रतिशत योगदान दिया। उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण में भी साल दर साल 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसने समग्र औद्योगिक उद्यमों के मुनाफे में 51.8 प्रतिशत योगदान दिया। वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार पर आधारित नई किस्म की उत्पादन शक्ति चीनी आर्थिक वृद्धि का मुख्य प्रेरक बन रही है।
पहली तिमाही में चीन के विदेश व्यापार के आंकड़े भी प्रभावशाली रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक उत्पादन और सप्लाई चेन में चीन का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण हो रहा है। पहली तिमाही में चीन के वस्तु व्यापार का आयात-निर्यात 118 खरब 40 अरब युआन रहा, जो इतिहास में सबसे अधिक है और साल दर साल 15 प्रतिशत बढ़ा। इसके अलावा, चीनी कस्टम्स के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही में चीन-भारत वस्तु व्यापार 4,313 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक था, जो साल दर साल 19.9 प्रतिशत बढ़ा। भारत के प्रति चीन का निर्यात और आयात क्रमशः साल दर साल 17.5 प्रतिशत और 37.5 प्रतिशत से अधिक रहा।
यह उल्लेखनीय है कि पहली तिमाही में चीन ने 49 खरब 90 अरब युआन की वस्तुएं आयात कीं, जो साल दर साल 19.6 प्रतिशत से अधिक थीं। आयात की वृद्धि दर निर्यात से 7.7 प्रतिशत अधिक रही। यह दर्शाता है कि चीन सक्रियता से आयात बढ़ा रहा है। चीनी राजकीय कस्टम्स प्राधिकरण के उप महानिदेशक वांग चुन ने हाल ही में बताया कि चीन न केवल विश्व का कारखाना है, बल्कि विश्व बाजार बनने की भी इच्छा रखता है।
पहली तिमाही में चीन के नागरिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) में स्पष्ट सुधार भी आया है। विशेष रूप से, इस मार्च में पीपीआई साल दर साल 0.5 प्रतिशत बढ़ी, जिसने लगातार 41 महीनों तक गिरावट की स्थिति को समाप्त किया है। इसे चीनी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि पहली तिमाही के अच्छे आर्थिक प्रदर्शन ने चीन के भविष्य के विकास के प्रति विश्वास को बढ़ाया है। हालांकि, इसके साथ ही, चीनी अर्थव्यवस्था का बाहरी वातावरण जटिल और गंभीर होता जा रहा है और घरेलू मांग की कमजोरी का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है। स्थिर वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अधिक सक्रिय नीतियों को लागू करने की आवश्यकता है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)