रामपुर तिराहा गोलीकांड बरसी: CM धामी ने शहीद स्मारक पर दी श्रद्धांजलि, बोले 'शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2 अक्टूबर 2026 को रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी पर देहरादून कचहरी स्थित शहीद स्मारक पहुँचकर राज्य निर्माण आंदोलन में सर्वोच्च बलिदान देने वाले आंदोलनकारियों को पुष्प चक्र अर्पित किया। इस भावपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि सरकार शहीदों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड का निर्माण करेगी।
मुख्यमंत्री धामी का श्रद्धांजलि संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित करते हुए कहा, 'आज 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी है। उत्तराखंड राज्य की प्राप्ति के लिए संघर्ष करने वाले उन सभी शहीदों को मैं नमन करता हूँ, जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान करके हम सभी को उत्तराखंड राज्य दिलाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर मार्ग प्रशस्त किया। हम ये संकल्प लेते हैं कि उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड बनाएंगे।'
धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास कार्यों को निरंतर गति दे रही है और जब तक उत्तराखंड देश का नंबर एक राज्य नहीं बन जाता, सरकार बिना रुके और बिना थके कार्य करती रहेगी।
महिलाओं और युवाओं के लिए सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर महिलाओं और युवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने रोज़गार के अवसर प्रदान करने और सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया। गौरतलब है कि यह घोषणा उत्तराखंड सरकार के महिला सशक्तीकरण के व्यापक एजेंडे का हिस्सा है।
गांधी और शास्त्री जयंती पर श्रद्धांजलि
यह अवसर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के साथ भी संयोग से जुड़ा रहा। मुख्यमंत्री धामी ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
धामी ने कहा, 'जहाँ बापू ने हमें सत्याग्रह और अहिंसा का मार्ग दिखाया, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने अपने नारे "जय जवान, जय किसान" से सभी के अंदर आत्मविश्वास भरा, ऊर्जा दी और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।' उन्होंने दोनों विभूतियों के प्रति सम्मानपूर्वक नमन किया।
रामपुर तिराहा गोलीकांड: पृष्ठभूमि
रामपुर तिराहा गोलीकांड उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की सबसे दर्दनाक स्मृतियों में से एक है, जब मुजफ्फरनगर में राज्य की माँग कर रहे आंदोलनकारियों पर गोलियाँ चलाई गई थीं। यह घटना उत्तराखंड के नागरिकों के लिए आज भी गहरे भावनात्मक महत्व की है और हर वर्ष इस दिन शहीदों को स्मरण किया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य गठन के ढाई दशक से अधिक समय बाद भी विकास की चाह जनमानस में बनी हुई है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि शहीदों की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और राज्य को सर्वांगीण विकास की ओर ले जाने का कार्य जारी रहेगा। राज्य सरकार की ओर से आगामी दिनों में महिला आरक्षण और रोज़गार से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।