क्या नॉलेज का कोई शॉर्टकट नहीं है? प्रतिदिन पढ़ना आवश्यक है: मुख्यमंत्री माणिक साहा
सारांश
Key Takeaways
- ज्ञान का कोई शॉर्टकट नहीं है
- प्रतिदिन पढ़ाई आवश्यक है
- पुस्तकें हमारी सोच को विस्तारित करती हैं
- लेखन का अभ्यास निरंतर होना चाहिए
- वंदे मातरम का विषय इस वर्ष के पुस्तक मेले का है
अगरतला, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शुक्रवार को कहा कि जीवन में सफलता के लिए कोई शॉर्टकट नहीं है और उन्होंने इस पर जोर दिया कि ज्ञान प्राप्त करने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिदिन पढ़ाई करना आवश्यक है।
44वें अगरतला पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कलम तलवार से अधिक शक्तिशाली है। हम हर दिन एक नया अध्याय लिखते हैं। कोई शॉर्टकट नहीं है; हमें प्रतिदिन पढ़ाई करनी चाहिए, और यही सब कुछ प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है।
छात्रों को पाठ्यपुस्तकों से बाहर पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें हमारी शब्दावली को मजबूत करती हैं, लेखन कौशल में सुधार लाती हैं और सोचने एवं जागरूकता का विस्तार करती हैं।
उन्होंने बताया कि हमारा मस्तिष्क सबसे शक्तिशाली पुस्तकालय है। बच्चों को स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से बाहर किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि उनके विचार विस्तृत हों और उनकी रचनात्मकता में वृद्धि हो। हम जितना अधिक पढ़ेंगे, उतना ही हमारे लिए लाभकारी होगा। ऐसा कोई विषय नहीं है जिस पर लोग न लिख सकें।
पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुस्तकें भौतिक और मानसिक जगत के बीच एक पुल का काम करती हैं, जो लोगों को अज्ञात को जानने में मदद करती हैं और उन्हें ज्ञान और सत्य की ओर ले जाती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि किताबें लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती हैं। लेखन का अभ्यास निरंतर किया जाना चाहिए, जिसे बाद में पुस्तक का रूप दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगरतला पुस्तक मेला भारत और विदेशों में प्रसिद्ध है। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों के कारण बांग्लादेश से आगंतुक इस वर्ष शामिल नहीं हो सके, फिर भी पुस्तकों की बिक्री पिछले वर्ष के रिकॉर्ड को पार करने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मेले की तिथियों और समय में बदलाव किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।
साहा ने कहा कि कार्यक्रमों के दौरान किताबें भेंट करने की परंपरा समय के साथ लुप्त हो गई है। हमें इसे पुनर्जीवित करना चाहिए। किताब कभी भी धोखा नहीं देती। हर किसी को पढ़ाई के लिए एक निश्चित समय निकालना चाहिए और इसे एक आदत बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो एक वर्ष तक चलेगी। इस वर्ष के पुस्तक मेले का विषय भी ‘वंदे मातरम’ है।