क्या कांग्रेस ने चुनावी राज्यों के लिए 'वरिष्ठ पर्यवेक्षकों' की नियुक्ति की?

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क्या कांग्रेस ने चुनावी राज्यों के लिए 'वरिष्ठ पर्यवेक्षकों' की नियुक्ति की?

सारांश

कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रमुख राज्यों में वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। यह कदम पार्टी की चुनावी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे समय में जब कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। जानें इस संबंध में और क्या है खास।

Key Takeaways

  • कांग्रेस ने वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।
  • उद्देश्य: चुनावी रणनीति को मजबूत करना।
  • मुख्य राज्यों में चुनाव होने वाले हैं।
  • दिग्गज नेताओं की अनुपस्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
  • पार्टी खोई हुई जमीन को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।

नई दिल्ली/कोलकाता, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में तत्काल प्रभाव से पार्टी नेताओं को एआईसीसी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया।

एआईसीसी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी ने असम विधानसभा चुनावों के लिए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और बंधु तिर्की को वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

इसके साथ ही कांग्रेस ने केरल विधानसभा चुनावों के लिए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, कर्नाटक के मंत्री केजे जॉर्ज, राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और कन्हैया कुमार को वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनावों के लिए पार्टी ने मुकुल वासनिक, तेलंगाना के मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी, और काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने सुदीप रॉय बर्मन, शकील अहमद खान और प्रकाश जोशी को वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है।

असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जो अप्रैल और मई में होने की संभावना है। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमशः मई और जून में समाप्त हो रहा है। ऐसे में वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की घोषणा इन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए वरिष्ठ नेताओं की नियुक्ति इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कांग्रेस पिछले चुनावों में खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है।

बिहार विधानसभा चुनावों में कोई खास प्रभाव न डाल पाने के बाद, पार्टी अब आगामी राज्य चुनावों में चुनावी लाभ की तलाश में है। इसलिए, उसने पूर्व मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों सहित वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने और स्थिति में बदलाव लाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

हालांकि, पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त वरिष्ठ पर्यवेक्षकों में किसी भी दिग्गज नेता की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के लिए वाकई गंभीर है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में कांग्रेस की उपस्थिति सीमित है।

Point of View

जो पार्टी की चुनावी रणनीति को पुनर्जीवित करने का प्रयास करती हैं। हालांकि, वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने सवाल उठाए हैं कि क्या कांग्रेस वास्तव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने के लिए गंभीर है। यह देखना होगा कि पार्टी अपनी खोई हुई जमीन को कैसे पुनः प्राप्त करती है।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

कांग्रेस ने वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति क्यों की?
कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति को मजबूत करने और खोई हुई जमीन को पुनः प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।
कौन से राज्यों में वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं?
कांग्रेस ने असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में वरिष्ठ पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति क्या है?
कांग्रेस की चुनावी रणनीति पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त करना और चुनावी लाभ प्राप्त करना है।
क्या वरिष्ठ पर्यवेक्षकों में कोई दिग्गज नेता शामिल हैं?
पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त वरिष्ठ पर्यवेक्षकों में कोई भी दिग्गज नेता शामिल नहीं है, जिससे सवाल उठ रहे हैं।
अगले चुनाव कब होने वाले हैं?
अगले विधानसभा चुनाव अप्रैल और मई में होने की संभावना है।
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