क्या रात में ही कार्रवाई करना आवश्यक था, दिन में क्यों नहीं? तुर्कमान गेट के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान पर कांग्रेस नेता उदित राज
सारांश
Key Takeaways
- अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रात में की गई, जो सवाल खड़े करती है।
- दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था, लेकिन क्रियान्वयन का समय विवादास्पद है।
- राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
- केंद्र सरकार के ईडी का उपयोग विपक्ष के नेताओं के खिलाफ किया जा रहा है।
- लालू यादव को टारगेट किया जा रहा है, जो गरीबों के लिए खड़े रहे हैं।
नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तुर्कमान गेट के नजदीक एमसीडी द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर कांग्रेस नेता उदित राज ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था और एमसीडी ने इसे लागू करने का निर्णय लिया। लेकिन सवाल यह है कि कार्रवाई रात में ही क्यों की गई? दिन के समय भी अतिक्रमण हटाया जा सकता था।
कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यह दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था कि अतिक्रमण को हटाया जाए। इसे पूरा करने के लिए रात में 32 बुलडोजर का उपयोग किया गया। लेकिन अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई को रात में क्यों अंजाम दिया गया? दिल्ली में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण फैला हुआ है, और कोर्ट ने भी आदेश दिए हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। जबकि तुर्कमान गेट पर कार्रवाई हुई, यह एक राजनीतिक संकेत है। यदि कार्रवाई करनी थी तो इसे दिन में भी किया जा सकता था।
एसआईआर के मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर उदित राज ने कहा कि मुझे नहीं पता कि इससे भाजपा को नुकसान होगा या नहीं। ड्राफ्ट आने के बाद भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि हर बूथ पर 200 वोटर जोड़ने हैं। सवाल यह है कि एसआईआर सही है या गलत।
कोलकाता में ईडी की छापेमारी पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि केंद्र सरकार हर जगह ऐसा ही कर रही है। ईडी को केवल विपक्षी नेताओं में ही भ्रष्टाचार नजर आता है। उन्होंने कुछ ऐसे नेताओं का उल्लेख किया जो कभी विपक्ष में थे, उन पर आरोप लगे तो भाजपा में शामिल हो गए, और अब उन पर ईडी की कोई छापेमारी नहीं होती।
लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में उदित राज ने कहा कि यदि लालू यादव भाजपा के साथ होते, तो कोई मामला ही नहीं होता। केंद्र सरकार विपक्ष के नेताओं को लक्ष्य बनाती है। लालू यादव हमेशा गरीबों के लिए खड़े रहे हैं, पिछड़ों की आवाज बने हैं, और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।