27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या आप जानते हैं दादरा और नगर हवेली मुक्ति दिवस का गौरवशाली इतिहास?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या आप जानते हैं दादरा और नगर हवेली मुक्ति दिवस का गौरवशाली इतिहास?

सारांश

हर साल 2 अगस्त को मनाया जाने वाला दादरा और नगर हवेली का मुक्ति दिवस क्षेत्र के लिए गर्व का दिन है। यह दिन पुर्तगाली शासन से आजादी की याद दिलाता है और उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देता है जिन्होंने इसे भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया।

मुख्य बातें

दादरा और नगर हवेली का मुक्ति दिवस हर साल 2 अगस्त को मनाया जाता है।
यह दिन पुर्तगाली शासन से मुक्ति की याद दिलाता है।
स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मानित किया जाता है।
इस दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
मुक्ति दिवस हमें एकता और स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाता है।

नई दिल्ली, 1 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष 2 अगस्त को दादरा और नगर हवेली में मुक्ति दिवस का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। यह दिन इस क्षेत्र की पुर्तगाली शासन से मुक्ति की याद दिलाता है और उन साहसी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने 1954 में इस क्षेत्र को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया।

आज यह क्षेत्र केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली एवं दमन के रूप में जाना जाता है, जो अपनी समृद्ध संस्कृति और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।

दादरा और नगर हवेली का इतिहास 18वीं सदी में मराठों के शासन से आरंभ होता है। 1779 में, मराठा-पेशवा ने पुर्तगालियों के साथ एक मित्रता संधि के तहत नगर हवेली के 72 गांवों का राजस्व उन्हें सौंप दिया। 1785 में पुर्तगालियों ने दादरा को भी अपने अधीन ले लिया। लगभग 170 वर्षों तक इस क्षेत्र ने पुर्तगाली शासन के दौरान भ्रष्टाचार, आदिवासी समुदायों के शोषण और उपेक्षा का सामना किया।

भारत की 1947 में मिली आजादी के बाद भी पुर्तगालियों ने गोवा, दमन, दीव और दादरा-नगर हवेली जैसे क्षेत्रों को छोड़ने से इनकार किया। 1954 में यहां स्वतंत्रता संग्राम ने जोर पकड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आजाद गोमांतक दल और नेशनल लिबरेशन मूवमेंट जैसे संगठनों ने इस मुक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

31 जुलाई, 1954 को मूसलाधार बारिश में स्वयंसेवकों का एक जत्था सिलवासा की ओर बढ़ा। 2 अगस्त, 1954 को सिलवासा में पुर्तगाली सैनिकों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया गया।

प्रमुख नेता सेनहर लुइस डी गामा ने तिरंगा फहराया और भारतीय राष्ट्रगान गाकर इस क्षेत्र को भारतीय गणराज्य का हिस्सा घोषित किया। 1954 से 1961 तक यह क्षेत्र 'स्वतंत्र दादरा और नगर हवेली प्रशासन' के तहत संचालित रहा और 11 अगस्त, 1961 को इसे औपचारिक रूप से भारतीय संघ में शामिल किया गया।

मुक्ति दिवस के अवसर पर सिलवासा में विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम'दिवसो' और 'भावड़ा' के साथ उत्सव में शामिल होते हैं।

यह दिन उन शहीदों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे जंगलों और दमनगंगा नदी के लिए भी जाना जाता है। मुक्ति दिवस न केवल एक ऐतिहासिक जीत का उत्सव है, बल्कि एकता, साहस और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे देश की संस्कृति और एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर हमें उन सभी वीरों को याद करना चाहिए जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दादरा और नगर हवेली मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?
दादरा और नगर हवेली मुक्ति दिवस हर साल 2 अगस्त को मनाया जाता है।
इस दिन का महत्व क्या है?
यह दिन पुर्तगाली शासन से आजादी की याद दिलाता है और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सम्मानित करता है।
कौन से संगठन ने मुक्ति आंदोलन में भूमिका निभाई?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आजाद गोमांतक दल, और नेशनल लिबरेशन मूवमेंट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुक्ति दिवस पर कौन से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं?
इस दिन विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें पारंपरिक नृत्य और त्योहार शामिल हैं।
किसने तिरंगा फहराया?
बुजुर्ग नेता सेनहर लुइस डी गामा ने तिरंगा फहराया और क्षेत्र को भारतीय गणराज्य का हिस्सा घोषित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले