अमेठी विकास विवाद: दानिश आजाद ने स्मृति ईरानी का समर्थन किया, राहुल गांधी पर लगाए विफलता के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता स्मृति ईरानी के उस बयान का पूरा समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने दम पर अमेठी में चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं हैं। अंसारी ने आगे जाते हुए राहुल गांधी के प्रतिनिधित्व काल में अमेठी और रायबरेली में औद्योगिक विफलता का हवाला दिया।
मंत्री का बयान: '100 प्रतिशत सही हैं स्मृति ईरानी'
लखनऊ में पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, 'स्मृति ईरानी 100 प्रतिशत सही हैं। अमेठी की जनता को कांग्रेस पार्टी ने गुमराह किया है। चाहे रायबरेली हो या अमेठी, परिवारवादी कांग्रेस पार्टी वहाँ कुछ भी करने में नाकाम रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी जिन क्षेत्रों को अपना घर कहते हैं, वहाँ उन्होंने विकास के बजाय बर्बादी ही की। अंसारी ने आँकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि जब राहुल गांधी इन सीटों का प्रतिनिधित्व करते थे, तब रायबरेली और अमेठी में लगे उद्योगों में से बड़ी संख्या बंद हो गए।
मूल विवाद: स्मृति ईरानी का बयान
बुधवार, 15 अक्टूबर 2026 को स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए यह टिप्पणी की थी कि वे अमेठी में अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं। यह बयान 2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में आया, जिसमें स्मृति ईरानी को कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने इसी सीट से राहुल गांधी को पराजित किया था, जो उस चुनाव का सबसे चर्चित परिणाम रहा था।
समाजवादी पार्टी का पलटवार
इस राजनीतिक बयानबाज़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी दखल दिया। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने स्मृति ईरानी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे राहुल गांधी को निशाना बनाकर अपना कद बढ़ाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उन्हें कांग्रेस के एक साधारण कार्यकर्ता ने हरा दिया। वर्मा ने कहा, 'जब वे इस सदमे से उबर जाएंगी, तभी असली मुद्दों पर बात कर पाएंगी।' इस तरह सपा ने BJP और कांग्रेस दोनों से अलग रुख अपनाते हुए ईरानी की साख पर सवाल उठाए।
अमेठी का राजनीतिक इतिहास
अमेठी दशकों से गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। 2019 में स्मृति ईरानी की जीत को उस परंपरा को तोड़ने की दृष्टि से ऐतिहासिक माना गया था, लेकिन 2024 में कांग्रेस ने यह सीट पुनः अपने नाम कर ली। तब से अमेठी के विकास और जनप्रतिनिधित्व को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच बयानों का सिलसिला जारी है। यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावी ध्रुवीकरण का संकेत देता है।
आगे क्या होगा
उत्तर प्रदेश में BJP, कांग्रेस और सपा के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी रहने के संकेत हैं। अमेठी और रायबरेली में विकास के आँकड़ों को लेकर राजनीतिक दावे-प्रतिदावे आने वाले हफ्तों में और तेज़ हो सकते हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।