दिल्ली: क्राइम ब्रांच ने 161 किलो गांजा मामले के पैरोल जंपर को 5 साल बाद चंदर विहार से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 अक्टूबर 2026 को अजय जारवाल तोरेला (40) को गिरफ्तार किया — यह दोषी गांजा तस्कर 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान मिली पैरोल समाप्त होने के बाद जेल वापस नहीं लौटा था और तब से करीब पाँच वर्षों से फरार चल रहा था। तकनीकी निगरानी और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने चंदर विहार इलाके में जाल बिछाकर उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
मूल मामला और दोषसिद्धि
पुलिस अभिलेखों के अनुसार, आरोपी अजय जारवाल तोरेला को वर्ष 2011 में मालवीय नगर इलाके में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने उसके कब्जे से 161.2 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सज़ा सुनाई थी, जिसके बाद वह तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहा था।
पैरोल का दुरुपयोग और फरारी
कोविड-19 महामारी के दौरान जेलों में भीड़ कम करने के उद्देश्य से आरोपी को 2021 में पैरोल पर रिहा किया गया था। हालाँकि, पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद उसने जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा और पहचान छिपाने के लिए बेहद लो-प्रोफाइल जीवन जीता रहा। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वह ऑटो-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहा था।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के निर्देश पर इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई देवेंद्र कादियान और एचसी अजय भी शामिल थे। टीम ने तकनीकी और मानवीय खुफिया स्रोतों की मदद से निगरानी जारी रखी। गोपनीय सूचना के आधार पर हिमगिरि एन्क्लेव, गली नंबर-7 के पास जाल बिछाया गया। पुलिस को देखकर आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे दबोच लिया।
सत्यापन और पुनः कारावास
गिरफ्तारी के बाद आरोपी की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन तिहाड़ जेल प्रशासन से कराया गया। सत्यापन पूरा होने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसे अभी इस मामले में करीब ढाई वर्ष की सज़ा और काटनी है। इसके अतिरिक्त, उसके विरुद्ध चोरी और एनडीपीएस एक्ट के तहत दो पूर्व आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।
व्यापक अभियान का हिस्सा
क्राइम ब्रांच ने बताया कि यह गिरफ्तारी फरार अपराधियों और पैरोल जंपरों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, खुफिया जानकारी जुटाने, तकनीकी निगरानी और जमीनी कार्रवाई के समन्वित उपयोग से ही पाँच वर्षों से फरार इस आरोपी को पकड़ना संभव हो सका। गौरतलब है कि कोविड काल में दी गई पैरोल का दुरुपयोग करने वाले फरार दोषियों की तलाश राजधानी की पुलिस के लिए एक चुनौती बनी रही है, और यह मामला उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में सामने आया है।