12 अक्टूबर 2026
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दिल्ली: क्राइम ब्रांच ने 161 किलो गांजा मामले के पैरोल जंपर को 5 साल बाद चंदर विहार से दबोचा

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दिल्ली: क्राइम ब्रांच ने 161 किलो गांजा मामले के पैरोल जंपर को 5 साल बाद चंदर विहार से दबोचा

सारांश

पाँच साल तक ऑटो-रिक्शा चालक बनकर छिपा रहा 161 किलो गांजा मामले का दोषी, कोविड पैरोल का दुरुपयोग कर फरार हुआ था — दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी से चंदर विहार में दबोचा।

मुख्य बातें

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 12 अक्टूबर 2026 को गांजा तस्कर अजय जारवाल तोरेला (40) को गिरफ्तार किया।
आरोपी 2011 में मालवीय नगर से 161.2 किलोग्राम गांजा के साथ पकड़ा गया था और दोषी करार दिया गया था।
2021 में कोविड-19 पैरोल के बाद जेल वापस नहीं लौटा, करीब 5 वर्षों तक फरार रहा।
गिरफ्तारी के समय आरोपी ऑटो-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहा था।
अभी लगभग ढाई वर्ष की शेष सज़ा काटने के लिए तिहाड़ जेल वापस भेजा गया।
यह कार्रवाई पैरोल जंपरों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 अक्टूबर 2026 को अजय जारवाल तोरेला (40) को गिरफ्तार किया — यह दोषी गांजा तस्कर 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान मिली पैरोल समाप्त होने के बाद जेल वापस नहीं लौटा था और तब से करीब पाँच वर्षों से फरार चल रहा था। तकनीकी निगरानी और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने चंदर विहार इलाके में जाल बिछाकर उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।

मूल मामला और दोषसिद्धि

पुलिस अभिलेखों के अनुसार, आरोपी अजय जारवाल तोरेला को वर्ष 2011 में मालवीय नगर इलाके में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने उसके कब्जे से 161.2 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सज़ा सुनाई थी, जिसके बाद वह तिहाड़ जेल में सज़ा काट रहा था।

पैरोल का दुरुपयोग और फरारी

कोविड-19 महामारी के दौरान जेलों में भीड़ कम करने के उद्देश्य से आरोपी को 2021 में पैरोल पर रिहा किया गया था। हालाँकि, पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद उसने जेल प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, वह लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा और पहचान छिपाने के लिए बेहद लो-प्रोफाइल जीवन जीता रहा। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वह ऑटो-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहा था।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के निर्देश पर इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई देवेंद्र कादियान और एचसी अजय भी शामिल थे। टीम ने तकनीकी और मानवीय खुफिया स्रोतों की मदद से निगरानी जारी रखी। गोपनीय सूचना के आधार पर हिमगिरि एन्क्लेव, गली नंबर-7 के पास जाल बिछाया गया। पुलिस को देखकर आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे दबोच लिया।

सत्यापन और पुनः कारावास

गिरफ्तारी के बाद आरोपी की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन तिहाड़ जेल प्रशासन से कराया गया। सत्यापन पूरा होने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसे अभी इस मामले में करीब ढाई वर्ष की सज़ा और काटनी है। इसके अतिरिक्त, उसके विरुद्ध चोरी और एनडीपीएस एक्ट के तहत दो पूर्व आपराधिक मामले भी दर्ज हैं।

व्यापक अभियान का हिस्सा

क्राइम ब्रांच ने बताया कि यह गिरफ्तारी फरार अपराधियों और पैरोल जंपरों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, खुफिया जानकारी जुटाने, तकनीकी निगरानी और जमीनी कार्रवाई के समन्वित उपयोग से ही पाँच वर्षों से फरार इस आरोपी को पकड़ना संभव हो सका। गौरतलब है कि कोविड काल में दी गई पैरोल का दुरुपयोग करने वाले फरार दोषियों की तलाश राजधानी की पुलिस के लिए एक चुनौती बनी रही है, और यह मामला उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में सामने आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पाँच वर्षों तक एक दोषी आरोपी सामान्य पेशेवर जीवन जीता रहा और तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। पैरोल सत्यापन और रियल-टाइम ट्रैकिंग के अभाव में ऐसे मामले भविष्य में भी दोहराए जाने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजय जारवाल तोरेला को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
अजय जारवाल तोरेला को 2011 में मालवीय नगर से 161.2 किलोग्राम गांजा बरामदगी के एनडीपीएस एक्ट मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पैरोल जंप करने पर गिरफ्तार किया गया है। 2021 में कोविड पैरोल मिलने के बाद वह जेल नहीं लौटा था।
आरोपी कितने समय से फरार था और कहाँ से पकड़ा गया?
आरोपी करीब पाँच वर्षों से फरार था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के चंदर विहार स्थित हिमगिरि एन्क्लेव, गली नंबर-7 के पास से गिरफ्तार किया।
फरारी के दौरान आरोपी क्या कर रहा था?
पुलिस जाँच में पता चला कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए लो-प्रोफाइल जीवन जी रहा था और ऑटो-रिक्शा चालक के रूप में काम कर रहा था। वह लगातार अपने ठिकाने भी बदलता रहता था।
अब आरोपी को कितनी और सज़ा काटनी है?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी को अभी इस मामले में करीब ढाई वर्ष की सज़ा और काटनी है। तिहाड़ जेल से पहचान सत्यापन के बाद उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोबारा जेल भेज दिया गया है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच का पैरोल जंपरों के खिलाफ कोई विशेष अभियान चल रहा है?
हाँ, क्राइम ब्रांच के अनुसार यह गिरफ्तारी फरार अपराधियों और पैरोल जंपरों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है। इस अभियान में तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया स्रोतों का समन्वित उपयोग किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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