भारत के मुख्य न्यायाधीश 20 अप्रैल को 22वां डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान देंगे: साइबर अपराध और न्यायपालिका की भूमिका
सारांश
Key Takeaways
- मुख्य न्यायाधीश का व्याख्यान साइबर अपराध पर केंद्रित है।
- एआई चैटबॉट का शुभारंभ किया जाएगा।
- डीपी कोहली को सम्मानित किया जाएगा।
- व्याख्यान न्यायपालिका और पुलिस के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा।
- यह एक संवाद और ज्ञान-साझाकरण का मंच है।
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, 20 अप्रैल को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 22वां डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। इस व्याख्यान का विषय 'साइबर अपराध की चुनौतियां—पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका' होगा।
इस कार्यक्रम के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश एआई-संचालित नोटिस सत्यापन चैटबॉट अभय का उद्घाटन भी करेंगे। यह चैटबॉट लोगों को सीबीआई द्वारा जारी किए गए कथित नोटिस की प्रामाणिकता को सत्यापित करने में मदद करेगा। 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी के संदर्भ में यह नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित होगा।
इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवा के लिए लगभग 24 पदकों का वितरण भी किया जाएगा।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अपने संस्थापक निदेशक धर्मनाथ प्रसाद कोहली को डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान के माध्यम से सम्मानित करता है, जो कि वर्ष 2000 से आयोजित किया जा रहा है। कोहली का जन्म 1907 में उत्तर प्रदेश में हुआ था और उन्होंने 1931 में पुलिस सेवा में कदम रखा। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं और 1955 से दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) का नेतृत्व किया। 1 अप्रैल 1963 को, सीबीआई की स्थापना के समय, वह इसके संस्थापक निदेशक बने और 1968 तक अपनी सेवा जारी रखी।
कोहली ने सीबीआई के कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए इसे एक विश्वसनीय जांच एजेंसी में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मामलों की प्रभावी जांच पर जोर दिया और सभी स्तरों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया। उल्लेखनीय है कि 1967 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
यह व्याख्यान श्रृंखला विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख वक्ताओं को एकत्र करती है ताकि वे कानून प्रवर्तन, आपराधिक न्याय और जांच से संबंधित चुनौतियों पर अपने विचार साझा कर सकें। यह संवाद और ज्ञान-साझाकरण के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे आधुनिक पुलिस व्यवस्था और जवाबदेही के प्रति समझ को बढ़ावा मिलता है। इस पहल के माध्यम से कोहली के दृष्टिकोण को दर्शाया गया है, जो जांच कार्य में व्यावसायिकता और उत्कृष्टता को महत्व देता है—ये वे मूल्य हैं जो सीबीआई के कार्यों का मार्गदर्शन करते रहते हैं।