दिल्ली बस गैंगरेप: तीस हजारी कोर्ट ने चार्जशीट पर लिया संज्ञान, चालक-परिचालक पर POCSO व BNS के तहत आरोप
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने 29 सितंबर 2026 को चलती बस में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप मामले में पुलिस द्वारा दाखिल करीब 400 पन्नों की चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। यह मामला कश्मीरी गेट मेट्रो थाना क्षेत्र से संबंधित है, जहाँ पीड़िता की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने संज्ञान लेते हुए मामले में आगे की सुनवाई और आरोप-निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: क्या हुआ था
पुलिस के अनुसार, यह घटना 4 अगस्त को परी चौक के पास हुई थी। पीड़िता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली नाबालिग है, जो पढ़ाई को लेकर माँ की डाँट के बाद बिना परिवार को बताए घर से निकल गई थी।
पीड़िता ग्रेटर नोएडा से बस में सवार हुई और नोएडा सेक्टर 63 जा रही थी, जहाँ उसका चचेरा भाई रहता है। आरोप है कि मैनपुरी से दिल्ली आ रही उस बस में चालक और परिचालक ने उसके साथ गैंगरेप किया। विरोध करने पर दोनों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता को दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट के पास बस से बाहर फेंक दिया गया।
चार्जशीट में क्या है
जाँच पूरी होने के बाद पुलिस ने बस चालक कुलदीप और परिचालक संदीप के विरुद्ध करीब 400 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पॉक्सो (POCSO) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
चार्जशीट में 50 सरकारी गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में जुटाए गए भौतिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है।
अदालत में अब आगे क्या होगा
तीस हजारी अदालत द्वारा चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले में आरोप-निर्धारण (charge framing) की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह न्यायिक प्रक्रिया का वह चरण है जिसमें अदालत तय करती है कि अभियुक्तों पर किन धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
गौरतलब है कि POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में होती है और इनमें समयबद्ध निपटारे का प्रावधान है।
सामाजिक परिप्रेक्ष्य और चिंताएँ
यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब सार्वजनिक परिवहन में महिला सुरक्षा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। बस में चालक और परिचालक जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप, यात्री सुरक्षा की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हैं।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी फोरेंसिक साक्ष्यों और बस के रूट की जाँच के आधार पर की गई। अब न्यायालय में मुकदमे की प्रगति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।