स्लीपर बस गैंगरेप: तीस हजारी कोर्ट ने चालक-कंडक्टर पर आरोप तय, 24 अक्टूबर से ट्रायल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने 8 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आ रही एक चलती स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में बस चालक कुलदीप और कंडक्टर संदीप के विरुद्ध आरोप तय कर दिए हैं। फास्ट ट्रैक अदालत में 24 अक्टूबर 2026 से दोनों आरोपियों के खिलाफ विधिवत ट्रायल आरंभ होगा, जिसमें अभियोजन पक्ष अपने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत करेगा।
मामले का घटनाक्रम
यह घटना 4 अगस्त 2026 की है। पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली नाबालिग छात्रा नोएडा सेक्टर-63 में अपने रिश्तेदार से मिलने जा रही थी। रास्ते में वह परी चौक के निकट उतर गई, जहाँ उसने एक स्लीपर बस रुकवाकर चालक और कंडक्टर से रास्ते की जानकारी ली। आरोप है कि उसे बताया गया कि बस सेक्टर-63 की दिशा में जा रही है, जिसके बाद वह उसमें सवार हो गई।
पुलिस की जाँच के मुताबिक, उस समय बस में कोई अन्य यात्री नहीं था। बस के आगे बढ़ते ही कंडक्टर ने कथित तौर पर नाबालिग के साथ अभद्र व्यवहार किया और विरोध करने पर उसे धमकी दी। अनुमानित 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चालक और कंडक्टर ने कथित तौर पर बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी भी दी। बाद में पीड़िता को कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया, जहाँ से वह ऑटो के ज़रिये पुलिस स्टेशन पहुँची और घटना की सूचना दी।
चार्जशीट और अदालती कार्यवाही
दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2026 में तीस हजारी कोर्ट में 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें करीब 50 अभियोजन गवाहों के बयान शामिल हैं। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को चार्जशीट का संज्ञान लिया था। दोनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के अंतर्गत अपहरण, गलत तरीके से रोकने और सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगाए गए हैं।
बस की सुरक्षा में गंभीर खामियाँ
जाँच में बस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई चिंताजनक तथ्य सामने आए। चार्जशीट के अनुसार, बस में लगा सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था और खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे हुए थे। इसके अलावा बस पर 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे और चालक व कंडक्टर की नियुक्ति से पहले उचित पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया था। ये खामियाँ सार्वजनिक परिवहन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
गिरफ्तारी और आगे की राह
घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की सहायता से बस की पहचान की और कुछ ही घंटों में उसे तिमारपुर इलाके से बरामद कर लिया। दोनों आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अब आरोप तय होने के साथ मामला न्यायिक प्रक्रिया के अगले और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। 24 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले ट्रायल में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के समक्ष रखेगा — इस मामले में न्याय की दिशा अब अदालती कार्यवाही पर निर्भर करेगी।