10 अगस्त 2026
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उद्योग भवन के पास मजदूर बस्ती में भीषण आग, 'मेक-4' घोषित; कोई हताहत नहीं

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उद्योग भवन के पास मजदूर बस्ती में भीषण आग, 'मेक-4' घोषित; कोई हताहत नहीं

सारांश

उद्योग भवन के पास सेंट्रल विस्टा मजदूरों की बस्ती में तड़के लगी आग को 'मेक-4' घोषित करना पड़ा — दिल्ली की सर्वोच्च अग्नि आपातकालीन श्रेणी। एलपीजी सिलेंडरों में धमाकों से आग और भड़की, लेकिन त्वरित कार्रवाई से कोई जनहानि नहीं हुई।

मुख्य बातें

नई दिल्ली के उद्योग भवन के पास मजदूर झुग्गी बस्ती में 24 जून की तड़के 3:02 बजे भीषण आग लगी।
आग को दिल्ली अग्निशमन सेवा ने 3:24 बजे उच्चतम श्रेणी 'मेक-4' में अपग्रेड किया।
प्रारंभिक जाँच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है; एलपीजी सिलेंडरों में विस्फोट से आग और तेज़ हुई।
बस्ती में सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के मजदूर रहते थे।
वॉटर टेंडर, फायर बाइक और अतिरिक्त वॉटर बाउजर तैनात; अब तक कोई हताहत नहीं ।
एक दिन पहले वाल्मीकि बस्ती में भी आग से 30 झोपड़ियाँ जलीं — दिल्ली में झुग्गी आग की लगातार घटनाएँ।

नई दिल्ली के उद्योग भवन के निकट बुधवार, 24 जून की तड़के सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से जुड़े मजदूरों की एक झुग्गी बस्ती में भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेज़ी से फैली कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को इसे 'मेक-4' — यानी उच्चतम आपातकालीन श्रेणी — में अपग्रेड करना पड़ा। त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

आग कैसे शुरू हुई

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आग की शुरुआत लेबर झुग्गी इलाके में स्थित एक इलेक्ट्रिक पैनल में हुई। अधिकारियों ने बताया कि संभावित कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। बस्ती में मौजूद कमर्शियल और छोटे एलपीजी सिलेंडरों में एक के बाद एक धमाके हुए, जिससे आग और भड़की और देखते-देखते पूरी बस्ती में फैल गई। आग की असल वजह का पता लगाने के लिए जाँच जारी है।

मुख्य घटनाक्रम

दिल्ली अग्निशमन सेवा के मंडलीय अधिकारी संदीप दुग्गल ने बताया, "सुबह करीब 3:02 बजे कॉल मिली और हमारी पहली फायर यूनिट्स कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुँच गईं। आग की गंभीरता को देखते हुए सुबह करीब 3:24 बजे घटना को मेक-4 में अपग्रेड कर दिया गया।"

मौके पर वॉटर टेंडर, फायर बाइक और बाद में अतिरिक्त वॉटर बाउजर भी तैनात किए गए। फायरफाइटर्स ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और इसे आसपास की इमारतों तक फैलने से रोका।

नुकसान का आकलन

अधिकारी मजदूर बस्ती को हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। बस्ती में रहने वाले अधिकांश मजदूर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में कार्यरत बताए जा रहे हैं। आग की भीषणता के बावजूद इमरजेंसी सर्विस और पुलिस की तेज़ प्रतिक्रिया के चलते अब तक कोई हताहत या घायल नहीं हुआ।

दिल्ली में झुग्गी आग की बढ़ती घटनाएँ

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में झुग्गी बस्तियों में आग की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के पीछे तकिया काले खान इलाके की वाल्मीकि बस्ती में भी आग लगी थी, जिसमें 30 झोपड़ियाँ और बड़ी मात्रा में प्लाईवुड, लकड़ी तथा अन्य ज्वलनशील सामान जलकर राख हो गए थे। उस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ था।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में अस्थायी बस्तियों में बिजली के अस्थायी कनेक्शन और ज्वलनशील निर्माण सामग्री आग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। उद्योग भवन जैसे व्यस्त इलाकों में मजदूर बस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर यह घटना नए सवाल खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फायर सर्विस की तेज़ प्रतिक्रिया का नतीजा है। लेकिन असली सवाल यह है कि सेंट्रल विस्टा जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के मजदूर अस्थायी, ज्वलनशील झुग्गियों में क्यों रह रहे हैं? बड़े बुनियादी ढाँचे के निर्माण के साथ-साथ श्रमिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जवाबदेही का हिस्सा होना चाहिए — जो इन घटनाओं से उजागर होती कमी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्योग भवन के पास मजदूर बस्ती में आग कब और कैसे लगी?
आग 24 जून की तड़के 3:02 बजे लगी। प्रारंभिक जाँच में इलेक्ट्रिक पैनल में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है। बस्ती में मौजूद एलपीजी सिलेंडरों में विस्फोट से आग और तेज़ी से फैली।
'मेक-4' आग की श्रेणी क्या होती है?
'मेक-4' दिल्ली अग्निशमन सेवा की उच्चतम आपातकालीन श्रेणी है, जिसे तब घोषित किया जाता है जब आग की गंभीरता अत्यधिक हो और बड़े पैमाने पर संसाधन तैनात करने की ज़रूरत हो। इस घटना में यह दर्जा सुबह 3:24 बजे दिया गया।
क्या इस आग में कोई हताहत हुआ?
अब तक किसी के हताहत या घायल होने की कोई सूचना नहीं है। इमरजेंसी सर्विस और पुलिस की त्वरित कार्रवाई को इसका श्रेय दिया जा रहा है।
इस बस्ती में कौन से मजदूर रहते थे?
बस्ती में मुख्यतः सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से जुड़े निर्माण मजदूर रहते थे। यह बस्ती उद्योग भवन के निकट स्थित थी।
क्या दिल्ली में हाल ही में ऐसी और घटनाएँ हुई हैं?
हाँ, इससे एक दिन पहले मंगलवार को मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के पीछे वाल्मीकि बस्ती में आग लगी थी, जिसमें 30 झोपड़ियाँ जलकर राख हो गई थीं। उस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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