उद्योग भवन के पास मजदूर बस्ती में भीषण आग, 'मेक-4' घोषित; कोई हताहत नहीं
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के उद्योग भवन के निकट बुधवार, 24 जून की तड़के सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से जुड़े मजदूरों की एक झुग्गी बस्ती में भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेज़ी से फैली कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) को इसे 'मेक-4' — यानी उच्चतम आपातकालीन श्रेणी — में अपग्रेड करना पड़ा। त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
आग कैसे शुरू हुई
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आग की शुरुआत लेबर झुग्गी इलाके में स्थित एक इलेक्ट्रिक पैनल में हुई। अधिकारियों ने बताया कि संभावित कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। बस्ती में मौजूद कमर्शियल और छोटे एलपीजी सिलेंडरों में एक के बाद एक धमाके हुए, जिससे आग और भड़की और देखते-देखते पूरी बस्ती में फैल गई। आग की असल वजह का पता लगाने के लिए जाँच जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
दिल्ली अग्निशमन सेवा के मंडलीय अधिकारी संदीप दुग्गल ने बताया, "सुबह करीब 3:02 बजे कॉल मिली और हमारी पहली फायर यूनिट्स कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुँच गईं। आग की गंभीरता को देखते हुए सुबह करीब 3:24 बजे घटना को मेक-4 में अपग्रेड कर दिया गया।"
मौके पर वॉटर टेंडर, फायर बाइक और बाद में अतिरिक्त वॉटर बाउजर भी तैनात किए गए। फायरफाइटर्स ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और इसे आसपास की इमारतों तक फैलने से रोका।
नुकसान का आकलन
अधिकारी मजदूर बस्ती को हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। बस्ती में रहने वाले अधिकांश मजदूर सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में कार्यरत बताए जा रहे हैं। आग की भीषणता के बावजूद इमरजेंसी सर्विस और पुलिस की तेज़ प्रतिक्रिया के चलते अब तक कोई हताहत या घायल नहीं हुआ।
दिल्ली में झुग्गी आग की बढ़ती घटनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में झुग्गी बस्तियों में आग की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। गौरतलब है कि इससे ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज के पीछे तकिया काले खान इलाके की वाल्मीकि बस्ती में भी आग लगी थी, जिसमें 30 झोपड़ियाँ और बड़ी मात्रा में प्लाईवुड, लकड़ी तथा अन्य ज्वलनशील सामान जलकर राख हो गए थे। उस घटना में भी कोई हताहत नहीं हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में अस्थायी बस्तियों में बिजली के अस्थायी कनेक्शन और ज्वलनशील निर्माण सामग्री आग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। उद्योग भवन जैसे व्यस्त इलाकों में मजदूर बस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर यह घटना नए सवाल खड़े करती है।