क्या आप जानना चाहेंगे ज्ञान की देवी के स्वागत की तैयारी के बारे में?
सारांश
Key Takeaways
- बसंत पंचमी का त्योहार ज्ञान और विद्या का प्रतीक है।
- दिल्ली के मेहरौली-बदरपुर रोड पर मूर्ति बाजार में भारी भीड़ है।
- श्रद्धालु मां सरस्वती की पूजा के लिए प्राकृतिक मूर्तियां खरीद रहे हैं।
- यह पर्व नई शुरुआत और बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है।
- मूर्तिकार अपनी मेहनत के अनुसार मूर्तियों के दाम रखते हैं।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूरे देश में बसंत पंचमी का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 23 जनवरी को मां सरस्वती की पूजा का यह शुभ अवसर है, जिसके लिए लोग जोश-खरोश के साथ तैयारियों में जुटे हैं। दिल्ली में सरस्वती माता की मूर्तियां खरीदने की धूम मची हुई है।
मेहरौली-बदरपुर रोड पर स्थित मूर्ति बाजार में पर्व से एक दिन पहले भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान लोग अपनी पसंद की खूबसूरत और प्राकृतिक मूर्तियां चुनने में जुटते नजर आए।
बाजार में मौजूद खरीदारों ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि यहां पर उपलब्ध मूर्तियां काफी अच्छी और प्राकृतिक हैं।
एक खरीदार ने कहा, "हमने यहां से नेचुरल मूर्तियां खरीदी हैं। शुक्रवार को बसंत पंचमी के मौके पर हम सभी लोग माता रानी की पूजा-अर्चना करेंगे। केवल इस साल ही नहीं, बल्कि हर साल हम सभी लोग मां सरस्वती की पूजा करते हैं।"
एक अन्य खरीदार ने अपनी मन की भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, "मां सरस्वती हमारी ज्ञान की देवी हैं। वे हमें बुद्धि, विद्या और समझ प्रदान करती हैं, इसलिए इस पर्व पर हम उनकी पूजा करते हैं। ऐसा हम कई सालों से करते आ रहे हैं। कम से कम 4-5 साल से तो नियमित रूप से यहां आते हैं।"
उन्होंने मूर्तियों के दाम बढ़ने पर कहा, "मूर्तिकार मूर्तियां बनाने में बहुत मेहनत करते हैं। वे अपनी मेहनत के हिसाब से मूर्तियों के दाम रखते हैं। कभी-कभी मूर्तियां सस्ती भी मिल जाती हैं, तो कभी थोड़ी महंगी भी होती हैं, लेकिन यहां हर तरह की अच्छी मूर्तियां उपलब्ध हैं। लोग अपनी सुविधा के अनुसार पहले भी आते हैं और बाद में भी आते हैं। हम तो कई सालों से इसी बाजार से मूर्तियां लेते आ रहे हैं। यहां की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है।"
बसंत पंचमी को विद्या, विवेक और नई शुरुआत का पर्व माना जाता है। इस दिन माता सरस्वती की विशेष पूजा का विधान है। श्रद्धालु सुबह शुभ मुहूर्त में पूजा-अर्चना और ज्ञान की प्राप्ति की कामना करते हैं। इसी के साथ ही मान्यता है कि यह त्योहार बसंत ऋतु की शुरुआत का भी प्रतीक है, जिसमें लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और नई शुरुआत की कामना करते हैं।