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महंत राजू दास ने कीर्ति आजाद के बयान की आलोचना की, राजनीति पर सवाल उठाए

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महंत राजू दास ने कीर्ति आजाद के बयान की आलोचना की, राजनीति पर सवाल उठाए

सारांश

महंत राजू दास ने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद के टी-20 विश्व कप पर दिए बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और देश की एकता को खतरे में डालते हैं।

मुख्य बातें

महंत राजू दास कीर्ति आजाद के बयान की निंदा करते हैं।
धार्मिक भावनाओं का सम्मान आवश्यक है।
राजनीतिक बयानबाजी को धर्म से दूर रखना चाहिए।

अयोध्या, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के पुजारी महंत राजू दास ने टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद द्वारा टी-20 विश्व कप के संदर्भ में दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। महंत ने कहा कि ऐसे बयान न केवल हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि देश की एकता के लिए भी खतरा हैं।

उनका मानना है कि जैसे हम खाते हैं, हमारा मन उसी प्रकार का होता है; जैसे हम पीते हैं, हमारा व्यवहार उसी अनुरूप होता है। हमारी भावनाएं इस बात पर निर्भर करती हैं कि हम ईश्वर को कैसे देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी का मकसद पश्चिम बंगाल को भारत से अलग करना है और इसके लिए हिंदू और मुसलमानों के बीच मतभेद उत्पन्न करना है।

महंत राजू दास ने यह भी बताया कि कीर्ति आजाद उसी पार्टी के नेता हैं, जिसके मुख्यमंत्री ने एक दलित राष्ट्रपति का अपमान किया। उनका कहना है कि भारत जैसे देश में राष्ट्रपति को किसी कार्यक्रम में शामिल होने से रोकना उचित नहीं है। महंत ने कहा कि भारतीय लोग सनातनी राम भक्त हैं और वे अपनी धार्मिक भावनाओं का सम्मान चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने टी-20 विश्व कप की ट्रॉफी हनुमान जी के चरणों में अर्पित की और इसमें कुछ भी गलत नहीं था। यह केवल भगवान के प्रति श्रद्धा और देशभक्ति का प्रतीक है। इस पर राजनीति करना उचित नहीं है।

महंत राजू दास ने आगे कहा कि कुछ लोग इस घटना का राजनीतिकरण कर रहे हैं और वही लोग देश में एकता नहीं चाहते। उनके अनुसार, ऐसे लोग हिंदू और मुसलमानों के बीच मतभेद उत्पन्न करना चाहते हैं और देश के नागरिकों के भावनात्मक अधिकारों का अपमान करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह देश विरोधी मानसिकता है और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू और सनातनी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। देशभक्ति और भगवान के प्रति श्रद्धा के बीच कोई विरोध नहीं होना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह इस बात का संकेत है कि राजनीतिक बयानबाजी धर्म और संस्कृति के प्रति सम्मान को प्रभावित कर सकती है। ऐसे समय में जब देश की एकता को बनाए रखना आवश्यक है, यह जरूरी है कि सभी पक्ष सतर्कता से कार्य करें।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महंत राजू दास ने कीर्ति आजाद के बयान पर क्या कहा?
महंत राजू दास ने कीर्ति आजाद के बयान की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे बयान हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
टी-20 विश्व कप की ट्रॉफी का हनुमान जी के चरणों में अर्पित करने का क्या मतलब है?
महंत राजू दास ने इसे भगवान के प्रति श्रद्धा और देशभक्ति का प्रतीक बताया।
क्या महंत राजू दास ने राजनीति पर सवाल उठाए?
हाँ, उन्होंने कहा कि राजनीति को धार्मिक भावनाओं से दूर रहना चाहिए।
महंत राजू दास का भारत की एकता पर क्या दृष्टिकोण है?
उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम मतभेद पैदा करना चाहते हैं, जो देश की एकता के लिए खतरा है।
महंत राजू दास ने कौन से सामाजिक मुद्दों पर ध्यान दिया?
उन्होंने राष्ट्रपति के अपमान और धार्मिक भावनाओं के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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