क्या दिल्ली के उद्यमियों के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने सरकार-गारंटीड क्रेडिट की घोषणा की?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली क्रेडिट गारंटी योजना लघु उद्यमियों के लिए नई संभावना लेकर आई है।
- बिना गारंटी के लोन की सुविधा उपलब्ध होगी।
- इस योजना के तहत 10 करोड़ रुपए तक का लोन प्राप्त किया जा सकेगा।
- बैंक 95 प्रतिशत तक लोन की गारंटी सरकार देगी।
- महिला उद्यमियों को विशेष सहायता दी जाएगी।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी में सूक्ष्म और लघु उद्यमों को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम उठाया है। दिल्ली सचिवालय में मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली सरकार और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) के बीच दिल्ली क्रेडिट गारंटी योजना के कार्यान्वयन के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस योजना का प्रमुख उद्देश्य लघु उद्यमियों की सबसे बड़ी समस्या, यानी बैंक क्रेडिट तक पहुंच को आसान बनाना है, ताकि वे बिना किसी गारंटी या सुरक्षा के लोन प्राप्त कर सकें। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल न केवल उद्यमियों के लिए पूंजी तक पहुंच को आसान बनाएगी, बल्कि बैंकों द्वारा उठाए जाने वाले जोखिम को भी काफी कम करेगी, जिससे उन्हें बिना किसी झिझक के छोटे व्यवसायों को लोन देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह योजना दिल्ली के कारोबारी माहौल में सुधार करेगी, नवाचार को बढ़ावा देगी, रोजगार उत्पन्न करेगी और एक अधिक समावेशी शहरी अर्थव्यवस्था बनाने में सहायता करेगी।
इस अवसर पर दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सीजीटीएमएसई सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए बिना गारंटी वाले क्रेडिट की सुविधा प्रदान करने वाली एक विश्वसनीय राष्ट्रीय संस्था के रूप में उभरी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लाखों युवा विनिर्माण, सेवाओं और संबद्ध क्षेत्रों में स्टार्ट-अप और उद्यम शुरू करना चाहते हैं, लेकिन अक्सर वित्तीय सहायता की कमी के कारण संघर्ष करते हैं। इस एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद ऐसे उद्यमी अब बिना किसी गारंटी के 10 करोड़ रुपए तक का लोन प्राप्त कर सकेंगे।
सीएम रेखा गुप्ता ने योजना के संचालन विवरण के बारे में बताते हुए कहा कि दिल्ली क्रेडिट गारंटी योजना के तहत लोन गारंटी की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार और सीजीटीएमएसई द्वारा संयुक्त रूप से साझा की जाएगी। कुल लोन राशि में से सीजीटीएमएसई 75 से 90 प्रतिशत की गारंटी कवर करेगा, जबकि बाकी हिस्सा दिल्ली सरकार सिक्योर करेगी। इसके परिणामस्वरूप बैंकों द्वारा दिए गए 95 प्रतिशत तक लोन की गारंटी सरकार देगी, जिससे बैंकों का रिस्क सिर्फ 5 प्रतिशत रह जाएगा और वे छोटे व्यवसायों को अधिक विश्वास के साथ लोन दे पाएंगे।
उन्होंने आगे कहा कि यह योजना मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, रिटेल, शिक्षा और स्किल-ट्रेनिंग संस्थानों सहित कई सेक्टर को कवर करेगी। इस मकसद के लिए 50 करोड़ रुपए का एक विशेष फंड बनाया गया है। इस सीमित फंड का उपयोग करके बैंक लगभग 2,500 करोड़ रुपए तक का लोन दे पाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में इस फंड को बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस योजना को 50:1 के लीवरेज रेशियो के साथ डिज़ाइन किया गया है, जिसका अर्थ है कि 2 करोड़ रुपए के निवेश से 100 करोड़ रुपए तक का लोन मिल सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सरकार का वित्तीय जोखिम सीमित रहे, 10 प्रतिशत की एनपीए लिमिट भी तय की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रारंभिक लक्ष्य इस योजना के तहत एक लाख लाभार्थियों तक पहुंचना है। हालांकि, सीजीटीएमएसई ने स्पष्ट किया है कि लाभार्थियों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी। दिल्ली में कोई भी पात्र लघु उद्यमी जो योजना के मानदंडों को पूरा करता है, वह दिल्ली सरकार की गारंटी वाले लोन का लाभ उठा सकेगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि एमओयू से सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को बिना किसी गारंटी के आसानी से क्रेडिट मिल सकेगा। पहली बार उद्यमी बनने वालों और महिला उद्यमियों को उद्यमिता गतिविधि में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहायता दी जाएगी। उम्मीद है कि इस पहल से रोजगार के नए मौके उत्पन्न होंगे और दिल्ली में एक मजबूत और टिकाऊ एमएसई इकोसिस्टम बनेगा।
उन्होंने कहा कि सीजीटीएमएसई और दिल्ली सरकार के बीच यह सहयोग राजधानी में समावेशी आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। विकसित भारत का सपना तभी पूरा हो सकता है जब दिल्ली एक विकसित शहर बने, और यह योजना उस दिशा में एक मजबूत नींव रखती है।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पहल को दिल्ली के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना दिल्ली में लगभग दस लाख एमएसएमई के लिए एक बड़ा ढांचागत सुधार है, जिसमें 200,000 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक बैंकिंग तरीके जैसे कि बहुत ज्यादा दस्तावेज, प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात और गारंटी की जरूरतें लंबे समय से क्रेडिट तक पहुंच में बाधा रही हैं, खासकर महिला उद्यमियों के लिए। इन चुनौतियों का सामना करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। 10 करोड़ रुपए तक के बिना गारंटी वाले लोन के प्रावधान को गेम-चेंजर बताते हुए सिरसा ने स्पष्ट किया कि सरकार का मकसद केवल क्रेडिट देना नहीं है, बल्कि एमएसएमई को बड़े पैमाने पर निवेश और लंबे समय के विस्तार के लिए मजबूत बनाना है।